हल्द्वानी। एक साल पहले बैंक से लाखों रुपये नगद निकालने पर कुमाऊं के पांच प्रभागीय वन अधिकारी जांच के घेरे में आ गए हैं। प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं कपिल जोशी से जांच कर जवाब मांगा है। साथ ही सभी प्रभागीय वन अधिकारियों (डीएफओ) से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
प्रमुख वन संरक्षक ने मार्च 2017 में बैंक से लाखों रुपये निकालकर नगद लेन-देन करने वाले पांच डीएफओ के खिलाफ जांच सौंपी है। मार्च 2017 में पिथौरागढ़ के डीएफओ विनय भार्गव ने 1.27 करोड़, नैनीताल डीएफओ धर्म सिंह मीणा ने 69.02 लाख, अतिरिक्त भूमि संरक्षण रामनगर डीएफओ सुभाष चंद्रा नेे 40.66 लाख, तराई पूर्वी डीएफओ एनएम त्रिपाठी ने 94.75 लाख और भूमि संरक्षण रानीखेत वीके सिंह ने 57.50 लाख रुपये नगद निकासी की है।
वन विभाग के नियमानुसार सिर्फ दो हजार रुपये तक के भुगतान ही नगद किए जाएंगे। इसके ऊपर बैंक में ट्रांसफर होंगे। अब तो पौधरोपण करने वाले मजदूरों का भुगतान भी चेक और सीधे बैंक खाते में करने के निर्देश हैं। ऐसे में इतनी धनराशि का नगद लेन देन पर पांचों डीएफओ जांच के घेरे में आ गए हैं। जयराज ने कपिल जोशी को एक सप्ताह में कार्रवाई के लिखित निर्देश दिए हैं। इस संबंध में मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं ने सभी डीएफओ से स्पष्टीकरण मांगा है।
बैंक से लाखों की नगदी निकालने में प्रमुख वन संरक्षक ने बैठाई जांच
सीसीएफ कुमाऊं को एक हफ्ते में जांच कर रिपोर्ट देने के दिए निर्देश
वीके सिंह हो गए सेवानिवृत्त
रानीखेत भूमि संरक्षण में तैनात डीएफओ वीके सिंह सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अब सवालों के जवाब को लेकर वर्तमान में तैनात डीएफओ के पसीने छूट रहे हैं। माना जा रहा है कि सिंह से भी इस बाबत पूछा जा सकता है।
जांच पर वन अफसरों में नाराजगी
वन अधिकारियों का एक धड़ा इस जांच को लेकर नाराज है। उनका कहना है कि जंगल में निगरानी करने वाले वॉचर, पौधरोपण करने वाले मजदूर समेत अन्य कामों में भी लगे मजदूर नगद भुगतान मांगते हैं। अधिकांश श्रमिक उप्र, बिहार के होते हैं। इनका बैंक खाता नहीं होने पर नगद भुगतान ही एक विकल्प बचता है।