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जितना बड़ा भूखंड उतना ही बड़ा बेसमेंट!

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हल्द्वानी। बेसमेंट निर्माण के नियमोें की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। नियमानुसार भूखंड के अधिकतम 50 फीसदी हिस्से में ही बेसमेंट बनाया जा सकता है लेकिन यहां जितना बड़ा भूखंड उतना ही बड़ा उसका बेसमेंट। इतना होने के बाद भी जिम्मेदार विभागों के अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
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कुमाऊं की सबसे बड़ी व्यवसायिक मंडी होने के कारण शहर में कारोबारी गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। इसी के चलते यहां माल संस्कृति भी खूब फल फूल रही है। नैनीताल रोड से लेकर रामपुर रोड, बरेली रोड, कालाढूंगी रोड ही नहीं बल्कि शहर की पास कालोनियों में भी कई माल और कांप्लेक्स खड़े हो चुके हैं। ज्यादातर व्यवसायिक इमारतों में नियम कानूनों को दरकिनार कर बेसमेंट बनाए गए हैं।

ये हैं बेसमेंट के नियम
- पर्वतीय क्षेत्रों में ऐसे भूखंड जिनका सामने वाला हिस्सा (फ्रंट) न्यूनतम 18 मीटर और न्यूनतम क्षेत्रफल 2000 वर्ग मीटर हो वहां केवल एक बेसमेंट बनाया जा सकता है।
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- मैदानी क्षेत्रों में भूखंड की न्यूनतम चौड़ाई 24 मीटर और न्यूनतम क्षेत्रफल 2000 वर्ग मीटर में पार्किंग के लिए बेसमेंट में तीन तल का निर्माण किया जा सकता है।
- भूखंड में निर्धारित सैट बैक छोड़ते हुए बेसमेंट का निर्माण भूखंड के अधिकतम 50 फीसदी हिस्से में ही हो सकता है।
- बेसमेंट की छत भूखंड से अधिक नहीं होनी चाहिए
- बेसमेंट के प्रत्येक पार्किंग तल की ऊंचाई 2.4 मीटर और अधिकतम 4.5 मीटर होनी चाहिए
- बेसमेंट में ओपन रैंप निर्माण जरूरी है।
- बेसमेंट को न तो रिहायशी उपयोग में लाया जा सकता है और न ही उसमें शौचालय व रसोई घर का निर्माण हो सकता है।
- बेसमेंट का उपयोग घरेलू सामान, अज्वलनशील पदार्थ व अन्य सामान के भंडारण, डार्करूम, कोषकक्ष, बैंक सेलर, वातानुकूलन उपकरण, भवन की अनिवार्य संरक्षा के लिए लगाई गई मशीनों को रखने, पार्किंग स्थल, गैराज आदि के लिए किया जा सकता है।
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