भवाली (नैनीताल)। पहाड़ की शांत वादियां, शुद्ध हवाओं बीच 99 वर्ष पूर्व शहर के टीबी सैनिटोरियम में क्षय रोग आश्रम खोला गया। देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की पत्नी कमला नेहरू भी 10 मार्च 1934 से वर्ष 15 मई 1934 तक यहां भर्ती रहीं। एशिया के दूसरे नंबर के इस अस्पताल को सुधारने के तमाम दावे हुए। इसके बावजूद क्षय रोग आश्रम कोमा में पहुंच चुका है। पृथक राज्य उत्तराखंड की पांच सरकारों के आठ मुख्यमंत्री भी इसकी हालत नहीं सुधार सके। टीबी सैनिटोरियम को पहले कमला नेहरू चेस्ट इंस्टीट्यूट और फिर आयुष ग्राम में बदलने के बहाने कुप्रबंधन का मॉडल जरूर बनाकर रख दिया गया। अस्पताल में चार करोड़ की मशीनें जंक खा रही हैं। यहां 378 बिस्तर हैं। 161 कर्मचारियों की तैनाती के बावजूद यहां सिर्फ 22 मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
सैनिटोरियम स्थित क्षय रोग आश्रम में 22 मरीजों के लिए 378 बिस्तर, 161 कर्मचारी तैनात
पांच सरकार, आठ सीएम भी ऐतिहासिक संस्थान की हालत नहीं बदल सके
देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की पत्नी कमला नेहरू भी यहां भर्ती रहीं
पूर्व मुख्यमंत्रियों की घोषणाएं
पूर्व सीएम एनडी तिवारी ने कहा था टीबी सैनिटोरियम अब कमला नेहरू चेस्ट इंस्टीट्यूट के रूप में काम करेगा। यहां दिल समेत अन्य बीमारियों का इलाज किया जा सकेगा। इसी तर्ज पर 2007 में जापानी डैट रिलीफ ग्रांट एसिस्टेंस की मदद से चार करोड़ की मशीनें पहुंचाई गईं। वर्ष 2007 में राज्य सरकार बदली। भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी संस्थान के लिए खास नहीं कर पाए। तत्कालीन सीएम डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक के कार्यकाल में वर्ष 2010 में सैनिटोरियम की 3437 हेक्टेयर, 13 अक्तूबर 2010 को 0.563 हेक्टेयर भूमि आयुष ग्राम के नाम कर दी गई। कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, हरीश रावत इसके प्रति उदासीन रहे। पिछले हाइकोर्ट के आदेश के बावजूद सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी रुचि नहीं दिखाई। स्थानीय लोग अब यह नहीं समझ पा रहे हैं कि यह सैनिटोरियम, चेस्ट इंस्टीट्यूट या आयुष ग्राम में से क्या है।