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आईएसबीटी प्रकरण में नहीं आई टीम

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हल्द्वानी। अंतरराज्यीय बस अड्डे (आईएसबीटी) की जमीन के मामले में शनिवार को पेच और उलझ गया। हल्द्वानी पहुंचे वन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने साफ कहा कि जमीन का प्रस्ताव मिला तो मंत्रालय स्वीकार कर लेगा। यह तब है जबकि पूर्व में वन विभाग इस जमीन के प्रस्ताव को अस्वीकृत कर चुका है। इससे यह भी साफ हुआ कि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (यूओयू) के पास की जंगल की भूमि पर बस अड्डा बनाने का प्रस्ताव तक तैयार नहीं हुआ है।
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कुछ दिन पहले ही आईएसबीटी के लिए यूओयू के पास की वन भूमि का निरीक्षण किया गया था। पूर्व में वर्तमान सरकार ने गौलापार स्थित बस अड्डे के निर्माण को रुकवा दिया था और बस अड्डा हल्द्वानी शहर में ही कहीं बनाने का ऐलान किया था। इसके लिए यूओयू के पास की जमीन का निरीक्षण हुआ और अधिकारियों के साथ सर्किट हाउस में हुई बैठक में परिवहन सचिव डी सेंथिल पांडियन ने इस जमीन के निरीक्षण और फोरलेन के लिए दो दिन में तकनीकी टीम भेजने की बात की थी। एक सप्ताह बीतने के बाद भी तकनीकी टीम ने निरीक्षण नहीं किया। शनिवार को वन मंत्री डॉ. रावत ने जाहिर कर दिया कि बस अड्डे के लिए प्रस्ताव तैयार नहीं किया गया है। हरक का बयान भी और कई सवाल खडे़ कर रहा है। इस जमीन को पूर्व में भी बस अड्डे के लिए देखा गया था। उस समय वन विभाग ने खैर के जंगल का हवाला केंद्र ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया था। हरक ने यह स्पष्ट नहीं किया कि केंद्र की आपत्ति को अब कैसे दूर किया जाएगा। इसी तरह जमीन का प्रस्ताव परिवहन विभाग की ओर से आना है। सूत्र बता रहा हैं कि परिवहन विभाग भी इस मामले में कोई तैयारी नहीं कर रहा है।
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केंद्र की पूर्व की आपत्ति को दूर करने के लिए भी कोई कवायद नहीं
हरक के प्रस्ताव स्वीकार करने संबंधित बयान से और उलझा मामला
तकनीकी परीक्षण एक हफ्ते बाद भी नहीं, परिवहन विभाग भी सुस्त
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