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गुप्त नवरात्र आज से

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हल्द्वानी। सालभर में चार बार नवरात्र आते हैं। इनमें से चैत्र में वासंतिक और आश्विन में शारदीय नवरात्र प्रत्यक्ष हैं और इन नवरात्रों में सभी लोग देवी भागवत, नवरात्र व्रत, देवी की विशेष उपासना आदि करते हैं। इसके अलावा दो नवरात्र ऐसे हैं जिन्हें आम जनमानस नहीं मनाता है। एक उत्तरायण में और दूसरी दक्षिणायन में आती है। उत्तरायण में पड़ने वाले गुप्त नवरात्र बृहस्पतिवार से शुरू हो रहे हैं। यह नवरात्र तंत्र साधना और सिद्धि के लिए विशेष मानी गई है। गुप्त नवरात्र आज 18 जनवरी से 26 जनवरी तक चलेंगे। गुप्त नवरात्र आमतौर पर उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, हिमाचल और उत्तराखंड में मनाए जाते हैं।
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तंत्र साधना, सिद्धि के लिए खास हैं गुप्त नवरात्र

ज्योतिषाचार्य डॉ. जगदीश चंद्र भट्ट, डॉ. गोपाल दत्त त्रिपाठी और डॉ. नवीन चंद्र जोशी बताते हैं कि गुप्त नवरात्र तंत्र साधना के लिए विशेष हैं। जो साधक तंत्र मंत्र की सिद्धि हासिल करना चाहते हैं, उनके लिए गुप्त नवरात्रि खास होती हैं। इन दिनों साधक गुप्त स्थान पर रहते हुए देवी की आराधना करते हुए दस महाविद्याओं की साधना में लीन होते हैं। वहीं गृहस्थ साधक नौ दिन दुर्गा सप्तशती और देवी कवच का पाठ करते हैं। देवी को प्रसन्न करने के लिए वह देवी का ध्यान कर कन्याओं को भोजन और दान आदि करते हैं। उन्होंने बताया कि मौनी अमावस्या के बाद गुप्त नवरात्रि शुरू हो जाती है। साधक मौन रह कर देवी की उपासना करते हैं। मौन साधना का बड़ा महत्व है। 22 को बसंत पंचमी का शुभ दिन भी है। माघ का महीना तपस्या के लिए सर्वोत्तम महीना माना जाता है। एक समय भोजन और दो समय स्नान करने का महत्व है। इन दिनों व्रत करने वाले की शीघ्र मनोकामना पूरी होती है।

सौंदर्य लहरी का पाठ श्रेयस्कर
ज्योतिषयों के मुताबिक गुप्त नवरात्र में देवी भागवत, दुर्गा सप्तशती का पाठ करना लाभकारी होता है। ज्योतिषी डॉ. जगदीश चंद्र भट्ट बताते हैं कि गुप्त नवरात्र में जगद्गुरु शंकराचार्य के ग्रंथ ‘सौंदर्य लहरी’ का पाठ करना श्रेयस्कर होता है। तंत्र साधना करने वाले लोग सौंदर्य लहरी का नवरात्र में नौ दिनों तक नियमित पाठ करते हैं।
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