हल्द्वानी। मंडलायुक्त चंद्रशेखर भट्ट ने कहा कि मर्म चिकित्सा सरल, सस्ती और सुलभ होने के साथ ही प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति है। इस चिकित्सा पद्धति से लकवा, मधुमेह, स्लिप डिस्क समेत कई असाध्य रोगों का इलाज संभव है। मैंने ऐसे रोगों का इलाज होते देखा है।
मंडलायुक्त चंद्रशेखर भट्ट ने सोमवार को अमर उजाला फाउंडेशन एवं मृत्युंजय मिशन के साझा प्रयास से लालडांठ रोड पर राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय में संचालित मृत्युंजय पुण्यशाला के फीता काटकर शुभारंभ किया। मंडलायुक्त ने मृत्युंजय मिशन के प्रतिनिधि की मांग पर राजकीय चिकित्सालयों के चिकित्सकों को मर्म चिकित्सा पद्धति के प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव शासन को भेजने का आश्वासन दिया। विशिष्ट अतिथि डीएम दीपेंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि कुछ दिन पहले ही उन्होंने इस चिकित्सा पद्धति से इलाज कराया था और काफी राहत भी मिली थी। हल्द्वानी में मृत्युंजय पुण्यशाला खुलने से क्षेत्रवासियों को पुरातन पद्धति से इलाज मिल सकेगा। इस इलाज के प्रति लोगों को जागरूक कर विश्वास जगाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सीपी भैसोड़ा ने सुझाव दिया कि आईएमए को मर्म चिकित्सा के प्रशिक्षण के लिए आगे आना चाहिए। हरिशरणम् जन के संस्थापक रामगोविंददास भाई जी ने कहा कि अमर उजाला फाउंडेशन शहर के मर्म को पकड़ कर कल्याण कर रहा है। अमर उजाला का प्रकाश मर्म चिकित्सा के क्षेत्र में भी फैलेगा ऐसी उम्मीद है। जिला आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. कृष्ण सिंह नपल्चयाल ने आयुर्वेद में वर्णित मर्म चिकित्सा के महत्व के बारे में बताया। मृत्युंजय मिशन के प्रतिनिधि मयंक जोशी ने कहा कि जो काम, निष्काम होता है वही पुण्य बनता है। मिशन का उद्देश्य इस चिकित्सा पद्धति को आम जनता तक पहुंचाना है। लालडांठ स्थित आयुर्वेदिक चिकित्सालय के प्रभारी डॉ. अजयकांत अग्रवाल ने पिछले एक माह का अपना अनुभव बताया और कहा कि इस पद्धति से सर्वाइकल, स्पांडलाइटिस, उच्च रक्तचाप के मरीजों को काफी आराम मिला है। अमर उजाला हल्द्वानी के यूनिट हेड हरीश भट्ट ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से मर्म चिकित्सा का शिविर पिछले वर्ष एक से पांच अक्टूबर तक हो चुका है। टनकपुर में 24 से 26 फरवरी तक मर्म चिकित्सा का शिविर होगा। इसके अलावा रुद्रपुर एवं काशीपुर में भी शिविर आयोजित किए जाएंगे। साथ ही मृत्युंजय पुण्यशाला अन्य जिलों में भी खोली जाएंगी।
मर्म चिकित्सा से संभव है इन रोगों का इलाज
मर्म चिकित्सा विशेषज्ञ दिनेश पंत (आरोग्यम फाउंडेशन)और धीरज पाठक ने बताया कि जिन रोगों में अन्य पद्धतियां उतनी करगार नहीं हो पातीं, उनका उपचार भी मर्म चिकित्सा से संभव है। उनके मुताबिक मर्म चिकित्सा पद्धति से प्रोलैक्स स्लिप डिस्क, संधिवात, खराब घुटने, सर्वाइकल फ्रोजन शोल्डर, लकवा, पोस्ट पोलियो, पैरेसिस, कार्पल टनल सिंड्रोम, माइग्रेन, दमा, रक्तचाप, हृदयरोग, सेरिब्रल न्यूरेल्जिया स्नायु, मधुमेह संबंधी रोगों का इलाज संभव है।
ये रहे मौजूद
वरिष्ठ फिजीशियन एवं आईएमए हल्द्वानी के अध्यक्ष डॉ. मोहन तिवारी, आईएमए हल्द्वानी के सचिव एवं विवेकानंद हास्पिटल के एमडी डॉ. महेश शर्मा, कृष्णा हास्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के डॉ. हरभजन सिंह, नीलकंठ हास्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. गौरव सिंघल, मैट्रिक्टस हास्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. प्रदीप पांडे, सेंट्रल हास्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. संजय जुयाल, साईं हास्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. मोहन सती, बांबे हास्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. शैलेंद्र मिश्रा, सेना से जुड़े कैप्टन डॉ. यासिर, निखिल, डॉ. जेड खान, डॉ. शिवम मणि, आरोग्यम फाउंडेशन के नवीन वर्मा एवं मोहन सिंह बोरा, सिटी मजिस्टेट पंकज उपाध्याय, एसपी सिटी अमित श्रीवास्तव, एसडीएम एपी बाजपेयी, मास्टर ट्रेनर डॉ. जगदीश सती, मास्टर ट्रेनर डॉ. मीरा जोशी, चिकित्साधिकारी डॉ. शैलेश जोशी, चिकित्साधिकारी डॉ. रोली जोशी, चिकित्साधिकारी डॉ. पूजा कांडपाल, पवनकांत, भाग्यश्री, खीम सिंह नगदली, नमिता पंत, ललित कुमार, सुमन करगेती।