हल्द्वानी। धारी तहसील के झड़गांव निवासी पान सिंह बीते डेढ़ दशक से गैंगरीन नामक बीमारी से जूझ रहे हैं। इसके चलते शरीर में लगातार बढ़ रहे संक्रमण के कारण पान सिंह को अब तक शरीर के कई अंग गंवाने पड़े हैं। बीमारी के इलाज के लिए वह न केवल अपनी आठ नाली जमीन और जेवर बेच चुके हैं, बल्कि कई लोगों से 17 हजार रुपये कर्ज भी ले चुके हैं। आर्थिक तंगी के कारण उनकी एक बेटी की पढ़ाई भी छूट गई है। बेहद आर्थिक संकट से जूझ रहे पान सिंह के परिजनों के समक्ष अब धनाभाव के कारण इलाज का संकट खड़ा हो गया है।
वर्ष 2002 में 43 वर्षीय पान सिंह पुत्र उदय सिंह को पैदल चलते समय ढोकर लग गई थी, जिससे उनके पैर की एक अंगुली बुरी तरह जख्मी हो गई थी। कुछ समय बाद इस जख्मी अंगुली में संक्रमण हुआ तो उन्होंने सुशीला तिवारी अस्पताल में इलाज कराया। इलाज के बाद भी जब अंगुली ठीक नहीं हुई तो डाक्टरों ने आपरेशन कर उनकी अंगुली काट दी। अंगुली के शरीर के जुदा होने के बाद भी संक्रमण थमा नहीं और धीरे-धीरे शरीर के अन्य अंग भी संक्रमण की चपेट में आ गए। परिजन फिर उन्हें सुशीला तिवारी अस्पताल लाए तो डाक्टरों ने बताया कि उन्हें गैंगरीन नामक बीमारी है। डाक्टरों ने दवाइयां दी, लेकिन बीमारी डेढ़ दशक बाद भी ठीक नहीं हुई है। तब से अब तक डाक्टरों ने शरीर के संक्रमण वाले अंगों के आठ आपरेशन कर किए। एक बार तो संक्रमण रोकने के लिए डाक्टरों को उनके पेट की नश को भी काटना पड़ा।
पान सिंह बताते हैं कि गैंगरीन का संक्रमण शरीर के अन्य अंगों में भी फैल रहा है। एसटीएच में उनका इलाज कर रहे डा. शैलेंद्र सिंह भंडारी का कहना है कि हाथ में संक्रमण बढ़ चुका है लिहाजा अब उनका दूसरा हाथ भी काटना होगा। उन्होंने बताया कि उन्हें विकलांग पेंशन के रूप में एक हजार रुपये मिलते हैं जबकि उनकी 20 दिन की दवा की कीमत 2795 रुपये है। इसके चलते परिवार इस कदर आर्थिक रूप से तंगी में आ गया कि उन्हें अपनी एक बेटी की पढ़ाई भी छुड़ानी पड़ी है। उनके दो लड़के और एक लड़की किसी तरह अभी गांव के स्कूल में अध्ययनरत हैं। पान सिंह ने समाजसेवियों से इलाज के लिए आर्थिक रूप से मदद की अपील की है। मदद करने वाले नैनीताल कोआपरेटिव बैंक की खनस्यू शाखा के पान सिंह के खाता संख्या 000234001002326 में धनराशि जमा करा सकते हैं। बैंक का आईएफएससी कोड वाईईएसबीओएनडीसीबी 01है।
गैंगरीन में संक्रमण के चलते शरीर के संबंधित हिस्से में खून की आपूर्ति बंद हो जाती है, जिससे शरीर का हिस्सा धीरे-धीरे पूरी तरह से मृत हो जाता है। इसके संक्रमण वाले इस हिस्से को काटना पड़ता है। ऐसा प्रोस्ट्रीडियन बैक्टीरिया के कारण होता है। संक्रमण शरीर के अन्य हिस्सों में न फैले इसके लिए अनुभवी चिकित्सक से इलाज कराना चाहिए और नियमित रूप से चिकित्सक द्वारा बताई गई दवाओं का सेवन करना चाहिए। - डॉ. नीलांबर भट्ट, वरिष्ठ चिकित्सक