नैनीताल। प्राथमिक सहायक अध्यापक भरती प्रक्रिया में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) की अनिवार्यता को चुनौती देने वाले उत्तरकाशी और चमोली के याचिकाकर्ताओं को उच्च न्यायालय से राहत मिल गई है। शुक्रवार को न्यायालय ने इनको भरती प्रक्रिया में शामिल करने का अंतरिम आदेश जारी किया है।
चमोली निवासी मुकेश कुमार और उत्तरकाशी के जगत सिंह ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने 2008-09 राष्ट्रीय शिक्षक प्रशिक्षण परिषद (एनसीटीई) का दो वर्षीय डिप्लोमा किया है और साथ ही अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) भी उत्तीर्ण की है । जिला शिक्षा अधिकारी प्राथमिक उत्तरकाशी तथा जिला चमोली ने सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया के तहत 11 जुलाई 2017 के विज्ञापन जारी किया। इसमें जिसमे केवल उन अभ्यर्थियों को आमंत्रित किया गया है जिन्होंने संबंधित डाइट से डीएलएड और टीईटी पास किया हो।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रदेश सरकार एनसीटीई के निर्धारित न्यूनतम योग्यता धारी अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में शामिल होने से नही रोक सकते। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनके द्वारा प्राप्त डिप्लोमा एनसीईटी द्वारा मान्यता प्राप्त है। उन्हें भर्ती प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए। याचिका में प्राथमिक शिक्षक सेवा नियमावली 2012 व संशोधन नियमावली 2013 को भी चुनौती दी गयी है। न्यायाधीश मनोज कुमार तिवाड़ी की एकल पीठ ने जिला शिक्षा अधिकारी प्राथमिक चमोली और उत्तरकाशी को याचिकाकर्ताओं को भर्ती प्रक्रिया में शामिल करने तथा याचिकाकर्ताओं का चयन परिणाम बिना न्यायालय के अनुमति से घोषित न करने का आदेश जारी किया है। चार सप्ताह में मामले में जबाब दाखिल किए जाने के आदेश भी दिए गए हैं।
डायट की अनिवार्यता को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं को भरती प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश
उत्तरकाशी और चमोली का है मामला