जब तक कोई हादसा या घटना न हो तब तक सरकारी अफसर जागते नहीं है। लगता है शिक्षा विभाग और नगर निगम के अफसरों को शायद ऐसा ही कुछ इंतजार है।
रेलवे बाजार प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले 112 बच्चों की जान खतरे में है, लेकिन शिक्षा विभाग समेत नगर निगम प्रशासन के अफसर मामले की जानकारी होने के बावजूद इसे गंभीरता से नहीं ले रहे।
जबकि स्कूल भवन को जर्जर घोषित किया जा चुका है, बावजूद इसके बच्चों को इसी स्कूल भवन में पढ़ाया जा रहा है।
रेलवे बाजार के पास रामलीला मोहल्ले में शिक्षा विभाग द्वारा प्राइमरी स्कूल संचालित किया जा रहा है। जिस भवन में स्कूल चलता है वह भवन नगर निगम का है, जिसका निर्माण वर्ष 1965 में हुआ था।
इस प्राइमरी स्कूल में रेलवे स्टेशन के आसपास के इलाकों के बच्चे पढ़ते हैं। किसी समय में इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या 300 से अधिक होती थी लेकिन छात्र संख्या पांच वर्षों में घट कर 112 रह गई है।
रेलवे बाजार प्राइमरी स्कूल पहले दो मंजिल भवन में चलता था, लेकिन तीन वर्ष पूर्व स्कूल भवन की दूसरी मंजिल गिरताऊ होने पर उसे जर्जर घोषित कर कमरों में ताला डाल दिया गया।
अब बच्चों को भूतल के कमरे में बैठाया जा रहा है। दो कमरों में पांच क्लासें लगाई जा रही हैं। स्कूल भवन जर्जर होने के कारण बरसात में कभी भी गिरने की आशंका बनी रहती है।
इसके बावजूद शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ ही नगर निगम के अधिकारी स्कूल भवन को लेकर लापरवाह बने हैं। सीआरसी नगर की ओर से विभाग को इसकी रिपोर्ट भेजी जा चुकी है, पर कुछ नहीं हुआ।