नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय एमबीए से लेकर बीएससी और एमटेक तक की फर्जी डिग्रियां बांटने वाली फ्रॉड कंपनी पर हर हाल में कार्रवाई करने के मूड में है। अब कुविवि जालसाजों का पता और अन्य जानकारी हासिल करने के लिए विदेश मंत्रालय जाने पर विचार कर रहा है, क्योंकि तीन दिन बाद भी कनाडा की सत्यापन संस्था डब्ल्यूईएस ने आरोपी छात्रों के पते और अन्य जानकारियां नहीं दी हैं।
कनाडा की संस्था डब्ल्यूईएस ने बीते दिनों कुमाऊं विवि को पोस्ट, ईमेल के माध्यम से कुछ मार्कशीट, डिग्रियां सत्यापन के लिए भेजी थीं। विवि के सत्यापन में 12 मार्कशीट, डिग्रियां फर्जी साबित हो चुकी हैं। 33 की सत्यता जांची जा रही है। फर्जी साबित हो चुकी मार्कशीटें सौरभ गुप्ता, हरप्रीत कौर, असनीन बजाज, गुरुविंदर सिंह, मनप्रीत कौर, अनुज मित्तल, रीता अमित प्रेमजी, अवतार सिंह, पनीर सेलवन, अमनिंदर सिंह की हैं। विवि डब्ल्यूईएस से इन छात्र-छात्राओं के पते की जानकारी जुटाने का प्रयास कर रहा है। तीन दिन पहले इसके लिए विवि ने संस्था को मेल भेज दिया है, लेकिन संस्था ने जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई है। ऐसे में आरोपियों तक पहुंचने के लिए विवि प्रशासन विदेश मंत्रालय जाने पर विचार कर रहा है।
फ्रॉड कंपनी पर कार्रवाई को विदेश मंत्रालय जाएगा कुविवि
कनाडा की संस्था से तीसरे दिन भी नहीं मिले छात्रों के पते और अन्य जानकारी
विवि इन जालसाजों पर कठोर कार्रवाई के मूड में है। हमने कनाडा की संस्था से आरोपी छात्र छात्राओं के पते, अन्य जानकारी मांगी है ताकि मुकदमे में उसका जिक्र किया जा सके। मेरी कुलपति प्रो. डीके नौड़ियाल से वार्ता हुई है। जरूरत पड़ने पर हम विदेश मंत्रालय से मदद लेंगे। फर्जीवाड़ा करने वालों को किसी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।
-प्रो. संजय पंत, परीक्षा नियंत्रक, कुविवि।