हल्द्वानी। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) ने नंधौर टाइगर रिजर्व बनाने को सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी है। एनटीसीए ने मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक से टाइगर रिजर्व का कोर और बफर जोन स्पष्ट प्रस्ताव देने को कहा है। वर्तमान में हल्द्वानी वन प्रभाग और अभयारण्य में 22 से ज्यादा बाघ हैं। क्षेत्र हाथियों समेत अन्य दुर्लभ वन्यजीवों के लिए भी प्रसिद्ध है।
नंधौर को टाइगर रिजर्व बनाने की कोशिश लंबे समय से चल रही है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है टाइगर रिजर्व बनने के बाद एनटीसीए से सीधे आर्थिक मदद व अन्य सहायता मिल सकेगी। राज्य सरकार के बजट पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। पर क्षेत्रीय लोग टाइगर रिजर्व का विरोध कर रहे हैं। अब वन विभाग के पास एनटीसीए के डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ फॉरेस्ट निशांत वर्मा का पत्र पहुंचा है। इसमें वन विभाग को वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट-1972 के तहत बफर और कोर जोन का प्रस्ताव देने को कहा है।
राज्य से कोर के अलावा बफर जोन का मांगा प्रस्ताव
260 स्क्वायर किमी क्षेत्रफल में अभी अभयारण्य है
तो गुमराह किया जा रहा था
हल्द्वानी। वर्तमान में नंधौर अभयारण्य 260 स्क्वायर किमी क्षेत्रफल को ही नंधौर टाइगर रिजर्व बनाने की बात कही जा रही थी, लेकिन एनटीसीए के प्रस्ताव से साफ हो गया है कि कोर जोन के अलावा बफर जोन भी शामिल होगा। सूत्रों के अनुसार बफर जोन में 560 स्क्वायर किमी का एरिया शामिल होगा। इसमें हल्द्वानी, तराई वन प्रभाग, चंपावत से लेकर नैनीताल वन प्रभाग का हिस्सा शामिल होगा। बफर जोन बनने से वानिकी, खनन समेत कई कार्यों पर भी असर पड़ सकता है।