नैनीताल। अब नैनीताल में बेकार प्लास्टिक से दवा, ऊर्जा और ईंधन तैयार हो सकेगा। कुमाऊं विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर में बेकार प्लास्टिक का री-साइकिलिंग प्लांट तैयार किया गया है। इस प्लांट का नाम स्वयं-भू डब्ल्यूआरएम- 2021 रखा गया है।
राष्ट्रीय हिमालय अध्ययन मिशन और जीबी पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान के सहयोग से कुविवि के डीएसबी परिसर के रसायन विभाग स्थित नैनोसाइंस एंड नैनोटेक्नोलॉजी सेंटर के शोध छात्रों ने स्वयं-भू डब्ल्यूआरएम- 2021 नाम का बेकार प्लास्टिक का री-साइकिलिंग प्लांट तैयार किया है। करीब दो करोड़ रुपये की लागत से बनकर तैयार हुई इस अत्याधुनिक मशीन का प्रोजेक्ट 31 मार्च 2016 को कुविवि को मिला था। विवि के शोध छात्रों ने परियोजना अधिकारी डॉ. नंद गोपाल साहू के नेतृत्व में इसका काम जनवरी 2017 से शुरू किया। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत नैनीताल के आसपास के इलाकों से प्लास्टिक का बेकार सामान जमा किया जाएगा। इसमें नगर पालिका ने भी सहयोग का भरोसा दिया है। एकत्र प्लास्टिक को अलग-अलग वर्गों में बांटकर उसे साफ किया जाएगा। इसके बाद मशीन से री-साइकिलिंग की जाएगी। इस प्रक्रिया में ऊर्जा, ईंधन और कार्बन नैनोमटिरियल प्राप्त होंगे। इससे मिलने वाले कार्बन नैनोमटिरियल की एक ग्राम की कीमत दो सौ से सात सौ रुपये है। छात्रों का कहना है कि ये पदार्थ हमारे समाज के लिए काफी लाभकारी हो सकता है। इससे कम कीमत में दवा मुहैया कराने के प्रयास किए जाएंगे।
क्या है कार्बन नैनोमटिरियल
विवि के डीएसबी परिसर में बेकार प्लास्टिक री-साइकिलिंग के लिए तैयार की गई स्वयं-भू डब्ल्यूआरएम- 2021 मशीन से बनने वाले कार्बन नैनोमटिरियल को ग्राफीन भी कहते हैं। ये पदार्थ ग्रेफाइड की एकल परत होता है, जिसका क्षेत्रफल अधिक होता है। इसका प्रयोग दवाओं, सोलर सेल, फ्यूल सेल और बायो सेंसर में किया जाता है। इससे बनने वाले उपकरण और दवाएं कम कीमत में मिल सकेंगे।
मशीन क्यों है स्वयं-भू
इस अत्याधुनिक मशीन का नाम स्वयं-भू इसलिए रखा गया है क्योंकि इसे स्टार्ट करने में थोड़ा सा डीजल लगता है। स्टार्ट होने के बाद ये वेस्ट प्लास्टिक की रिसाइक्लिंग के दौरान पैदा हुई गैसों को संपीड़ित करके उससे प्राप्त ईंधन से संचालित होती है।
ये रहे परियोजना में शामिल
पीआई डॉ.नंद गोपाल साहू, सीओपीआई प्रो.एबी मेलकानी, प्रो.सत्यपाल सिंह बिष्ट, डॉ. महेंद्र राणा, शोध छात्र संदीप, मनोज, सुनील ढ़ाली, नेहा, हिमानी, चेतना, नीमा, गौरव, भास्कर बोरा, विनय दीप पुनेठा, सीमा आदि रहे। इस परियोजना से जुड़े संदीप और मनोज को देहरादून में आयोजित एक सेमिनार में कार्बन नैनोमटिरियल व वेस्ट मैनेजमैंट प्रोजेक्ट के लिए यूएसएसटीसी ने 2017-18 का युवा वैज्ञानिक पुरस्कार प्रदान किया है।