हल्द्वानी। कुमाऊं के सबसे बड़े स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट में आने वाले कैंसर मरीजों को बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है। कैंसर फिजीशियन, सर्जन न होने के कारण मरीजों को बाहर जाना पड़ रहा है। मुंह, गले, फेफड़े संबंधी कैंसर मरीजों का ग्राफ प्रतिवर्ष बढ़ रहा है मगर करोड़ों की मशीन, ढांचा होने के बावजूद व्यवस्था बदहाल है।
स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट में वर्ष 2008 से हायर एनर्जी लीनियर एक्सीलेटर, लो एनर्जी लीनियर एक्सीलेटर, सीटी सिम्यूलेटर, ब्रेकी थैरेपी, सी आर्म जैसी मशीनें हैं। वर्ष 2010 में कैंसर रोगियों की संख्या 2,886, 2011 में 2,952, 2012 में 4,251, 2013 में 4,728, 2014 में यह आंकड़ा 5,323 तक पहुंच गया था। इंस्टीट्यूट सूत्रों की मानें तो वर्तमान में प्रतिवर्ष करीब सात से आठ हजार रोगी इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं मगर उन्हें निराश लौटना पड़ता है। ऑपरेशन थियेटर के लिए आए तमाम उपकरण तो धूल फांक रहे हैं। फिजिस्ट न होने के कारण मशीनें चल नहीं पा रही है। मशीनों की सीएमसी का खर्च हंस फाउंडेशन उठा रहा है। इसके बावजूद स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट सिर्फ सफेद हाथी बनकर रह गया है।
हायर एनर्जी लीनियर एक्सीलेटर, सी आर्म मशीन का प्रयोग नहीं हो रहा
ऑपरेशन थियेटर के लिए आया काफी सामान नहीं खुल सका
स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट में करीब 20 करोड़ की मशीनें हैं