फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उम्रकैद की सजा से पिता बरी, बेटा छह को तलब

विज्ञापन
विज्ञापन
नैनीताल। मात्र 30 रुपये के विवाद में हत्या के मामले में निचली अदालत से आजीवन कारावास की सजा पाए अभियुक्त को उच्च न्यायालय ने बरी करने के आदेश जारी किए।
विज्ञापन

वरिष्ठ न्यायाधीश राजीव शर्मा तथा न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष केस की सुनवाई हुई। फरवरी 2013 में हल्द्वानी के बनभूलपुरा निवासी फिरोज खान ने प्राथमिकी दर्ज करा कर कहा था कि वह अपने पिता के साथ दुकान पर था जब पुत्तन की बेटी 50 रुपये का नोट लेकर आई। उसने 20 रुपये का सामान खरीदा तथा पिता ने 30 रुपये उसे वापस दिए। घर में उसकी मां ने 30 रुपये वापस मांगे तो बेटी ने कह दिया कि रुपये दुकानदार ने वापस नहीं किए। इस पर पुत्तन और उसका बेटा आदिल लाठी लेकर दुकान पर गए और उसके पिता शमीम और मां पर हमला कर दिया जिसमें शमीम की मौत हो गई। मामले में 2017 में 29 अप्रैल को निचली कोर्ट ने पुत्तन व उसके बेटे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। खंडपीठ ने पाया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शमीम की मौत का कारण दिल का दौरा पड़ना बताया गया था। कोर्ट ने पुत्तन को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त करार दिया तथा उसके बेटे आदिल को छह दिसंबर को कोर्ट में पेश करने के आदेश पारित किए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें