हल्द्वानी। उत्तराखंड के माओवादी झारखंड से पैसे का लेनदेन कोड के आधार पर करते हैं। हर बार कोड बदलते रहते हैं। कभी कोड आम होता है तो कभी अमरूद। कभी अन्य फल और पेड़ का नाम रख लिया जाता है। यदि कोड मालूम नहीं है तो पैसा मिलना मुश्किल होता है। टास्क को भी गोपनीय रखा जाता है।
गिरफ्तार माओवादी देवेंद्र चम्याल से जांच एजेंसियों से पूछताछ की तो कई खुलासे हुए। उत्तराखंड में संगठन को विस्तार देने का काम जोनल सचिव और 50 हजार के इनामी खीम सिंह बोरा के कंधों पर है। झारखंड से गोपनीय मैसेज आने पर संगठन के उच्च पदाधिकारी हर सदस्य को टास्क देते हैं। सदस्य टास्क को गोपनीय रखते हैं। कोड के आधार पर ही किसी बात को फैलाने की रणनीति बनाई जाती है। अपने मन से कोई सदस्य टास्क नहीं करता है। एक टीम को दूसरी टीम के टास्क की जानकारी नहीं होती है। संगठन की कोई गंभीर बात का खुलासा नहीं किया जाता है। यह विचारों की क्रांति है। पैसे भी किसी प्राइवेट कोरियर एजेंसी के मार्फत नहीं मंगाया जाता है। संगठन के व्यक्ति की कोरियर की भूमिका निभाता है। कोड बताने पर ही वह पैसा देते हैं। हर बार कोरियर का व्यक्ति बदल दिया जाता है। प्रशांत राही की गिरफ्तारी के बाद संगठन से जुड़े सदस्य कोड के आधार पर काम कर रहे हैं।
ऐसे होती है हथियारों की ट्रेनिंग
देवेंद्र ने बताया कि उसने झारखंड में दो स्थानों पर हथियारों की ट्रेनिंग ली है। देवेंद्र के मुताबिक संगठन के आकाओं ने बताया कि ऑपरेशन करते समय रिजर्व टीम पीछे रहेगी। आपरेशन के बाद हथियार और अन्य सामान पीछे लगी रिजर्व टीम इकट्ठा करेगी। यानी बम विस्फोट या फायरिंग के बाद माओवादी हथियार दूसरी टीम को मुहैया करा देते हैं। उद्देश्य यह रहता है कि पुलिस के हत्थे चढ़ने पर हथियार न पकड़े जा सकें। प्रशिक्षण में पहले छोटे हथियार चलाना सिखाया जाता है। बड़े हथियारों का प्रशिक्षण अंत में दिया जाता है।
पुलिस ने अब बनाई रणनीति
माओवादी देवेंद्र चम्याल सहित दो लोगों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की 15 सदस्यीय टीम ने अल्मोड़ा में डेरा डाल दिया है। डीआईजी ने माओवादियों के मंसूबों को ध्वस्त करने के लिए एसपी अल्मोड़ा और चंपावत के साथ बैठकर गोपनीय रणनीति तैयार की है। डीआईजी पूरन सिंह रावत ने एसपी चंपावत और अल्मोड़ा को रेंज कार्यालय में बुलाया था। बैठक के दौरान माओवादियों से संबंधित पुराने मुकदमों की समीक्षा की गई। डीआईजी ने एसओटीएफ की टीम को अल्मोड़ा में कांबिंग करने के लिए भेज दिया है।
ये हैं रणनीति के बिंदु
पुलिस अधीक्षक माओवादियों के मुकदमे में जमानतदारों और सफेदपोश संरक्षकों की सूची बनाएंगे।
पुलिस मुकदमों की पैरवी कर आरोपियों को सजा दिलाने की रणनीति पर काम करेगी।
सफेदपोशों के लिए अलग योजना बनाई गई है।
जिला पुलिस के साथ रेंज स्तर की टीम जंगल में कांबिग कर माओवादियों के अड्डों का पता लगाएंगी।
टीम 50 हजार के इनामी खीम सिंह बोरा और उसके साथियों को गिरफ्तार करने का प्रयास करेगी।
हंसपुर खत्ता सहित अन्य स्थानों पर नजर रखने के लिए एसपी चंपावत को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
एसपी उधमसिंहनगर और नैनीताल की पुलिस को अपने ढंग से माओवादी गतिविधियों पर नजर रखने को कहा है।