शिक्षा सचिव को हाइकोर्ट ने किया तलब
नैनीताल। हाइकोर्ट ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में सुधार करने के आदेश का अनुपालन न करने को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा सचिव को 22 जून को कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मंगलवार को मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी दीपक राणा ने हाइकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सभी सरकारी स्कूलों की व्यवस्था बहुत खराब है। स्कूल भवन खराब स्थिति में हैं और छात्र जमीन पर बैठकर पढ़ते हैं। सुनवाई के बाद कोर्ट ने 19 नवंबर 2016 को आदेश पारित किया था कि तीन माह में सरकारी स्कूलों में बेंच, डेस्क, चॉक और डस्टर के साथ ब्लैक बोर्ड, कंप्यूटर, पुस्तकालय आदि की व्यवस्था होनी चाहिए। छात्र-छात्राओं के लिए पृथक शौचालय होना चाहिए। माध्यमिक तक के छात्रों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाए, छात्रों के लिए दो यूनिफार्म होनी चाहिए। स्कूलों के भवन दुरुस्त होने चाहिए और स्कूलों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था होनी चाहिए। गर्मी में पर्याप्त पंखे और ठंड के दिनों में हीटर की व्यवस्था होनी चाहिए। सर्व शिक्षा अभियान के तहत बीस हजार रुपये का अतिरिक्त अनुदान मदरसों को देने के निर्देश भी दिए थे। न्यायालय ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति और गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले छात्र-छात्राओं को सहायता देने को कहा था। कोर्ट ने कहा था कि आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए शिक्षा सचिव व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। मंगलवार को कोर्ट में याचिकाकर्ता ने कहा कि कोर्ट के इन आदेशों का पालन अभी तक नहीं किया गया है।