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न डॉक्टर न मशीन मरीजों के स्वास्थ्य के साथ हो रहा खिलवाड़

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गरमपानी (नैनीताल)। सरकार, शासन और स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी पर्वतीय क्षेत्रों में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के मरीजों पर भारी पड़ रही है। इन अस्पतालों में डॉक्टर, दवाइयां, मशीनें और एंबुलेंस जैसी मूलभूत सुविधाएं न होने से मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना मजबूरी हो गया है।
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ऐसा ही हाल खैरना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है। पीपीपी मोड में संचालित इस अस्पताल में शुरू में सुविधाएं मिलीं, लेकिन पीपीपी मोड का करार खत्म होते ही विशेषज्ञ डाक्टरों के पद खाली होने के बाद मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर होने वाले हादसों के घायलों को इसी अस्पताल में लाया जाता है। नैनीताल और अल्मोड़ा जिले के करीब 100 गांवों के ग्रामीणों का यह नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र सुविधाओं के अभाव में रेफर सेंटर बन गया है।
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अस्पताल में अल्ट्रासाउंड, एक्सरे मशीन और विभिन्न प्रकार की लैब जांचों के नहीं होने से मरीजों को रानीखेत, अल्मोड़ा, हल्द्वानी के अस्पतालों में भेजना पड़ता है। अस्पताल परिसर में स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने से अधिकांश गर्भवती महिलाओं को हल्द्वानी रेफर करना पड़ता है।
किसान एवं खेत मजदूर कांग्रेस कमेटी महासचिव कृपाल सिंह मेहरा का कहना है कि सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना गर्भवती महिलाओं को करना पड़ रहा है। डॉक्टरों के अभाव में मरीजों को सारी जांचें बाहर से करानी पड़ रही है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुविधाओं के अभाव में बदहाल
गर्भवती महिलाओं को झेलनी पड़ती है सबसे ज्यादा दिक्कत

सीमित संसाधनों में दे रहे स्वास्थ्य सुविधाएं
मरीजों को सीमित संसाधनों से स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ दिया जा रहा है। 24 घंटे इमरजेंसी सेवाएं दे रहे हैं ताकि मरीजों को दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
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डॉ. सतीश पंत, प्रभारी चिकित्साधिकारी, खैरना
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