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कैंची चलाने को लेकर मुझे क्षत्रिय से दलित तक बताया गया ः प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह

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प्रीतम सिंह - फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी। कांग्रेस पार्टी भले ही एकजुटता की बात कर रही हो और कार्यकर्ताओं को इसका पाठ पढ़ा रही हो मगर बड़े नेताओं के दिलों में भीतर कहीं न कहीं एक-दूसरे के प्रति गुबार है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने इशारों में ही कहा कि कैंची चलाने में किसी ने भी कभी कमी नहीं की। कैंची चलाने के नाम पर उन्हें कभी क्षत्रिय बताया गया तो कभी अनुसूचित जाति और कभी अनुसूचित जनजाति का।
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दरअसल, विवाद सांसद प्रदीप टम्टा के बयान से उभरा। टम्टा ने कह दिया कि उनके क्षेत्र से किसी भी अनुसूचित जाति के कार्यकर्ता को एआईसीसी में किसी को नहीं लिया गया। इसके बाद प्रीतम सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि सम्मान सबको मिलता है। हमें एक दूसरे की टांग नहीं खींचनी चाहिए। कहा कि आप अनुसूचित जाति से हैं तो राज्यसभा गए और मैं अगड़ी जाति से हूं तो प्रदेश अध्यक्ष बना।

इसके बाद टम्टा भी उठकर खड़े हो गए और अपने तर्क दिए। टम्टा ने कहा कि मैं विवाद को बढ़ाना नहीं चाहता हूं मगर पहाड़ से एआईसीसी में कोई नहीं है। सिंह ने कहा कि मैं जमीन से चलकर आया हूं और किसी पर आक्षेप न लगाएं। किसने क्या किया है यह सभी को पता है। कहा कि कांग्रेस ने हर मुद्दे पर धरना प्रदर्शन किया है और सदन में उठाया है। इसका अगर रिकार्ड मांगेंगे तो तारीख वार ब्योरा उपलब्ध करा देंगे। सिंह ने कहा कि बहुत कुछ कह दिया तो बात बहुत दूर तक चली जाएगी।
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दस वर्ष सत्ता में रहे तो कार्यकर्ताओं को क्यों नहीं दिया सम्मान
हल्द्वानी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कुछ आक्रामक शैली में नजर आ रहे थे। तेवर और कलेवर तो बहुत ही विनम्र था मगर इशारों ही इशारों में उन्होंने निशाना बहुतों में साध दिया। कहा दिया कि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने पीसीसी की जैसी सूची सौंपी थी उन्होंने वैसी ही जारी की है।

वह किसी के नाम की कांट छांट में विश्वास करने वाले व्यक्ति नहीं हैं। फिर कहा कि आप दस वर्षों तक सरकार में रहे उस समय कार्यकर्ताओं का सम्मान किया या नहीं। सभी को अपने अंतर्मन को टटोल लेना चाहिए।
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