हल्द्वानी। बिना काम किए खाना नहीं पचता और न ही दिन में सोना पसंद है। यह कहना है प्रेमपुर लोसज्ञानी आदर्श भवन निवासी 87 वर्ष की रधूली देवी का। इतनी उम्र में भी उनमें जवानों सा जोश है।
वे रोज सुबह छह बजे उठकर पूजा-पाठ करती हैं। इसके बाद पास की दुकान से दूध लाकर बहू को थमा देती हैं। चाय की चुस्कियों के साथ दिनभर के काम का अपने दिमाग में खाका तैयार कर लेती हैं। इसके बाद उसे अमलीजामा पहनाने में लग जाती हैं।
उम्र के इस पड़ाव में चार पीढ़ी देख चुकीं रधूली मूल रूप से चौखुटिया कुल्स्यारी गांव के रहने वाली हैं। पति बरेली कत्था फैक्ट्री में कार्यरत थे और रिटायर होने के बाद हल्द्वानी बस गए। तब से पूरा परिवार यहीं बस गया। एक बेटा, चार बेटियां हैं सभी के हाथ पीले हो चुके हैं। भरे पूरे परिवार में चार नाती और एक नातिनी भी है।
ये है इनका स्वास्थ्य का राज-
- हरी पत्तेदार सब्जी, दालें और चिकन करी के साथ फलों में आम, सेब, संतरा और सना हुआ नींबू बहुत पसंद है।
- पानी खूब पीती हैं चाय से परहेज करती हैं।
- पहाड़ी व्यंजन काफी पसंद हैं और सप्ताह में एक बार भट्ट की चुड़कानी व झोली जरूर खाती हैं।
- रात में खाने के बाद एक गिलास दूध जरूर लेती हैं व दिन में खाने के साथ दो कटोरी दही उनकी दिनचर्या में शामिल है।
- शरीर को स्वस्थ रखने के लिए खेत पर काम करने के साथ घर के अन्य छोटे कार्यों को भी बखूबी कर लेती हैं।