रानीखेत (अल्मोड़ा)। रानीखेत जिले का जिन्न एक बार फिर बाहर निकल गया है। घोषित जिले को अस्तित्व में लाने की मांग को लेकर एक बार फिर से रानीखेत बार एसोसिएशन ने आंदोलन का बिगुल फूंकने का मन बना लिया है। शुक्रवार को अधिवक्ता संघ की यहां हुई बैठक में घोषणा के पांच साल बाद भी जिला अस्तित्व में नहीं आने पर आक्रोश जताया गया। 15 जनवरी को सभी संगठनों की आम बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में निर्णायक आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।
वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1954 से चली आ रही रानीखेत जिले की मांग आज तक पूरी नहीं हुई है, जबकि इसके लिए स्थानीय लोगों ने कई बार बड़े आंदोलन तक किए। वर्ष 2011 में अधिवक्ता संघ के बैनर तले सभी संगठनों ने छह माह से भी अधिक समय तक वृहद आंदोलन चलाया।
तब तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने रानीखेत से चार जिलों की घोषणा की, जो कि सिर्फ चुनावी घोषणा साबित हुई। इसके बाद आई कांग्रेस सरकार ने भी जिले को अस्तित्व में लाने के प्रयास नहीं किए। कहा कि नागरिकों और विभिन्न संगठनों के सहयोग से एक बार फिर वृहद आंदोलन शुरू किया जाएगा।
15 जनवरी को सभी संगठनों की बैठक बुुलाई गई है, जिसमें आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी। बैठक में कार्यकारी अध्यक्ष ललित मोहन आर्या, वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश रौतेला, प्रम भगत, देवेंद्र माहरा, महेंद्र अधिकारी, प्रभात बिष्ट, नवीन पंत, जरीना उमर, नवीन उपाध्याय, प्रेम सागर, दीपक कांडपाल, महेंद्र बिष्ट समेत कई अधिवक्ता मौजूद रहे।