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10 साल बाद पहुंची रिकवरी नोटिस

Sat, 18 Jun 2016 11:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, हल्द्वानी।
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अल्मोड़ा के रहने वाले एक वाहन स्वामी ने 1997 में वाहन बेच दिया। पर वाहन बेचने की प्रक्रिया के बाद कागजों में आरटीओ कार्यालय में मालिक के नाम का बदलाव नहीं कराया। 2006 तक तो खरीदने वाले टैक्स जमा किया। बाद में टैक्स जमा नहीं हुआ। अब वाहन का रिकवरी नोटिस पहुंचा, तो पता चला कि वाहन कागजों में उनका नाम ही जीवित है। अब मूल स्वामी आरटीओ कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं।
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ऊधम सिंह नगर के एक व्यक्ति वाहन बेच दिया। पर कागजों में नाम नहीं बदला गया। वाहन से एक्सीडेंट होने के बाद जब जांच शुरू हुई, तो मूल वाहन स्वामी तक खोजबीन करती हुई टीम पहुंच गई। अब संबंधित वाहन स्वामी इस परेशानी का हल तलाश कर रहे हैं।

हल्द्वानी। यह केस बताते हैं कि वाहन बेचने में लापरवाही और सरकारी प्रक्रिया पूरी करने के चलते कैसे लोग परेशानी में पड़ गए। ऐसे केस सप्ताह में आरटीओ कार्यालय में तीन से चार औसतन पहुंचते हैं। 
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आरटीओ एसके सिंह कहते हैं कि वाहन बेचने के समय कई बार लोग स्टांप पर लिखकर वाहन बेचने की प्रक्रिया को पूरी मान लेते हैं।

पर कागजों में वह ही मालिक बन रहते हैं। ऐसे में जब कोई नोटिस आदि पहुंचता है तो उनको स्थिति का पता चलता है। जिस तरह वाहन रजिस्ट्रेशन कराने की प्रक्रिया है, उसी तरह वाहन को बेचने के बाद नये रजिस्ट्रेशन कराने की औपचारिकता है जिसे पूरा करना चाहिए। एआरटीओ डा. गुरदेव सिंह कहते हैं कि नियमों की जानकारी न होना और कार्यालय जाने के झंझट से बचने के लिए लोग मौखिक या फिर बहुत हुआ स्टांप आदि पर वाहन बेच देते हैं। यह अवैध होता है। अगर किसी ने वाहन बेच दिया है, तो उसको फार्म-29 पर लिखकर आरटीओ कार्यालय को सूचना देनी चाहिए। यहां तक अगर पता भी बदल रहे हैं, तो एक महीने के अंदर विभाग को सूचना देनी चाहिए।
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