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आपदा में 7744 लोग हुए गुमशुदा

Mon, 01 Jul 2013 08:01 AM IST
गढ़वाल
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उत्तराखंड में हुए महा विनाश के बाद लापता हुए लोगों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। अब तक सरकारी रिकॉर्ड में सात हजार सात सौ 44 से अधिक लोगों की गुमशुदगी दर्ज हो चुकी है।
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पुलिस की वेबसाइट पर भी गुमशुदा लोगों के नाम और तस्वीरें अपलोड की जा रही हैं।

उत्तराखंड की पल-पल की अपडेट

केवल रुद्रप्रयाग जिले में ही 4470 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज की गई है। रुद्रप्रयाग पुलिस कार्यालय में मिसिंग हेल्पलाइन खोली गई है। लोग हेल्प लाइन के फोन नंबर, ऊखीमठ थाने और कोतवाली रुद्रप्रयाग में कॉल कर परिजनों की गुमशुदगी दर्ज करा रहे हैं।

कम हो सकती है यह संख्या
हेल्पलाइन के इंचार्ज एसआई जयपाल नेगी ने बताया कि अब तक 3120 गुमशुदगी लिखाई गई है। एसपी बरिंदर जीत सिंह ने बताया कि इसके साथ ही कोतवाली रुद्रप्रयाग में 150 और थाना ऊखीमठ में भी 1200 गुमशुदगी दर्ज कराई गई हैं। हालांकि उनका यह भी कहना है कि यह संख्या कम हो सकती है।
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इसका कारण उन्होंने एक व्यक्ति की अलग-अलग फोन नंबरों और अन्य माध्यमों से गुमशुदगी दर्ज करवाया जाना बताया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने फोन पर गुमशुदगी दर्ज कराई है, उन्हें लापता व्यक्ति की तस्वीर जमा कराने के लिए कहा गया है। ताकि वास्तविक संख्या पता चल सके।

कहां है कितने गुमशुदा?
चमोली जिले में लगभग 50 की गुमशुदगी दर्ज करवाई जा चुकी है। तहसील में अब तक केदारनाथ घाटी में लापता हुए 25 युवाओं की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। जोशीमठ से छह लोगों की गुमशुदगी की रिपोर्ट थाना जोशीमठ में दर्ज हुई है। इसके अलावा पोखरी में 11 और घाट क्षेत्र से आठ युवा लापता हैं।

टिहरी जिले के विभिन्न थानों में दर्ज रिकार्ड के अनुसार केदारघाटी में जलप्रलय के बाद 18 यहां के लोग लापता हैं। ऋषिकेश में 2780 लोगों ने गुमशुदगी दर्ज करवाई है। हरिद्वार में 426 की गुमशुदगी दर्ज हुई है।

...तो तसल्ली हो जाती
सिलीगुड़ी के मुकेश जिंदल की आखिरी उम्मीद भी टूट रही है। 16 जून के बाद से केदारनाथ गए उनके माता-पिता और अंकल-आंटी की कोई खबर नहीं आई। सेना का आपरेशन चल रहा था तो मन के किसी कोने में उम्मीद थी कि कुछ खबर तो मिलेगी। लेकिन अब यह उम्मीद भी टूट रही है।

परिजनों की तलाश में पहाड़ भी हो आए हैं। कहते हैं कि सरकारी आंकड़ों पर मत जाइए। कम से कम 10 हजार लोग लापता हैं। अगर एक परिवार से 10 लोग भी जुड़े हों तो 10 हजार से एक लाख लोग जुड़े होंगे। कहते हैं कि अब सेना लौट रही है। इससे एक लाख लोग पूरी तरह मायूस हो जाएंगे।

कुछ नहीं कर रही सरकार
अगर सरकार आपदा प्रभावित इलाकों में लापता लोगों की खोज में सर्च आपरेशन चलाती तो लोगों को तसल्ली हो जाती। लेकिन सरकार कुछ नहीं कर रही है। जयपुर के अमित शर्मा के परिवार के 10 लोग लापता हैं। विद्यानगर महाराष्ट्र के शशांक धानोरकर एवं शांतनु धानोरकर के माता-पिता का यही हाल है।
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लापता के परिजन कहते हैं कि उत्तराखंड सरकार एक बार सबको ठीक ढंग से सर्च तो करवा लेती। लेकिन यह भी नहीं हो रहा है।
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