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उत्तराखंड में सीधा मुकाबला, किसकी होगी जीत, किसे मिलेगी हार

Thu, 11 Apr 2019 05:53 AM IST
vivek shukla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तराखंड
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उत्तराखंड लोकसभा चुनाव 2019
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अल्मोड़ा : भाजपा के टम्टा के सामने कांग्रेस के टम्टा

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अल्मोड़ा लोकसभा (सुरक्षित) सीट पर भाजपा के अजय टम्टा और कांग्रेस के प्रदीप टम्टा के बीच सीधा मुकाबला है। अजय टम्टा केंद्र में राज्यमंत्री और लोकसभा सदस्य हैं, तो प्रदीप टम्टा राज्यसभा सदस्य। 

अजय को मोदी मैजिक, एयर स्ट्राइक के बाद इस क्षेत्र में काफी संख्या में मौजूद पूर्व सैनिकों के समर्थन से जीत का भरोसा है। उनके समर्थन में सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने खुद प्रचार का मोर्चा संभाला और दस जनसभाएं कीं। 
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दूसरी तरफ, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के करीबी माने जाने वाले कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप को कांग्रेस के परंपरागत वोटों पर भरोसा है। प्रदीप इस सीट से लंबे समय तक प्रतिनिधित्व कर चुके हरीश रावत के प्रभाव का लाभ लेने की कोशिश में हैं। वह पांच सालों में केंद्र सरकार और सांसद के तौर पर अजय की विफलताओं को सियासी मुद्दा बनाने की कोशिश में लगे रहे। अल्मोड़ा में हुई राहुल गांधी की जनसभा से कांग्रेस में जोश देख प्रदीप जीत की उम्मीद लगाए हुए हैं। अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित सीट के अंतर्गत 43 प्रतिशत राजपूत, 38 प्रतिशत ब्राह्मण,17 प्रतिशत एससी-एसटी मतदाता हैं। जातिगत आधार पर किसी एक प्रत्याशी को किसी खास वर्ग के मत मिलने की संभावना नहीं है।

नैनीताल : हिंदुत्व और राष्ट्रवाद बड़ा मुद्दा
हल्द्वानी। नैनीताल-ऊधमसिंह नगर में कांग्रेस के हरीश रावत और भाजपा के अजय भट्ट के बीच कड़ा मुकाबला है। हरीश रावत अपने मुख्यमंत्रित्व काल में किए गए विकास कार्यों, रोजगार, अलग-अलग वर्गों के लिए जारी की गई पेंशन सुविधाओं का हवाला देकर वोट मांग रहे हैं, तो दूसरी तरफ भाजपा के अजय भट्ट की ताकत मोदी फैक्टर है। 

अजय भट्ट के पक्ष में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ जनसभाएं कर चुके हैं। वहीं, हरीश रावत खुद ही चुनाव की कमान संभाले हुए हैं। भाजपा हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के नाम पर वोट बटोरने की जुगत में है। भाजपा को उम्मीद है कि इस सीट पर बड़ी संख्या में मौजूद पूर्व फौजियों का समर्थन उसको हासिल होगा। 

सपा-बसपा गठबंधन के संयुक्त प्रत्याशी नवनीत अग्रवाल बाहरी हैं। उनके समर्थन में मायावती की रुद्रपुर में हुई सभा के बाद बसपा के पक्ष में कुछ माहौल बना। इस सीट पर लगभग 27 फीसदी क्षत्रिय और 17 प्रतिशत ब्राह्मण, 16 प्रतिशत मुस्लिम, 18 प्रतिशत पंजाबी, 14 प्रतिशत एससी-एसटी, चार प्रतिशत बंगाली, चार प्रतिशत वैश्य व अन्य मतदाता हैं।

हरिद्वार : कमल का कितना रंग फीका कर सकेंगे हाथ-हाथी

हरिद्वार सीट पर इस बार त्रिकोणीय मुकाबला है। भाजपा से सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, कांग्रेस से अंबरीष कुमार और बसपा-सपा गठबंधन से अंतरिक्ष सैनी मैदान में हैं। 

संगठनात्मक ढांचे और मोदी मैजिक के बूते भाजपा मुकाबले में मजबूती से खड़ी है। वहीं, कमल के रंग को फीका करने के लिए कांग्रेस और बसपा पूरा जोर लगा रही हैं। यहां अल्पसंख्यक और अनुसूचित जाति के वोटों के लिए कांग्रेस और गठबंधन में जबरदस्त जंग छिड़ी है। उधर, भाजपा अपने पारंपरिक वोट बैंक पर फोकस करते हुए वोटों के ध्रुवीकरण का फायदा उठाने की फिराक में है।

भाजपा ने यहां पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ, शाहनवाज हुसैन जैसे स्टार प्रचारकों को उतारा। वहीं, कांग्रेस को अपने स्टार प्रचारकों से बहुत लाभ नहीं मिल पाया है। हालांकि राहुल गांधी ने हरिद्वार में सभा की थी। सचिन पायलट ने भी वोट मांगे हैं। दूसरी तरफ, मायावती की रुड़की में चुनावी रैली बसपा के लिए गांवों में माहौल बनाने में मददगार साबित हुई है।

गढ़वाल : जनरल के बेटे और शिष्य में सिमटी जंग
गढ़वाल। इस सीट से सांसद मेजर जनरल बीसी खंडूड़ी के बेटे मनीष खंडूड़ी के कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने और उनके खिलाफ जनरल के ही राजनीतिक शिष्य तीरथ सिंह रावत के मैदान में होने से मुकाबला खासा दिलचस्प हो गया। 

इस सीट पर बेशक नौ प्रत्याशी मैदान में हैं, लेकिन लड़ाई भाजपा और कांग्रेस बीच सिमट गई। मनीष को पार्टी में सीधे एंट्री कराने और उन्हें टिकट थमाने वाले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल ने श्रीनगर गढ़वाल में रैली जरूर की, लेकिन उनके अलावा कांग्रेस का कोई बड़ा चेहरा नहीं दिखाई दिया। वहीं, गढ़वाल सीट पर भगवा बुलंद रखने को भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी। पार्टी ने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को गोपेश्वर व कोटद्वार में उतारा गया है। 

सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत, पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी, सतपाल महाराज समेत अन्य मंत्रियों और नेताओं की टीम में मोर्चे पर चरणबद्ध ढंग से उतारी जाती रहीं। फौजी बहुल सीट पर भाजपा ने रणनीतिक ढंग से चुनाव को राष्ट्रवाद के मुद्दे पर केंद्रित रखा और उसके स्टार प्रचारकों ने इसे खूब हवा दी। कांग्रेस की काफी ऊर्जा इस मुद्दे पर जवाब देने में ही लगी। इस कारण पलायन, एनआईटी, मेडिकल कॉलेज सरीखे बुनियादी सवाल भी नेपथ्य में चले गए। 
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टिहरी : माला और प्रीतम के बीच है लड़ाई

देहरादून। टिहरी संसदीय सीट पर भाजपा की माला राज्यलक्ष्मी शाह और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के बीच कांटे की टक्कर है। माला की लगातार तीसरी जीत के लिए भाजपा ने ताकत झोंक रखी है, तो प्रीतम अकेले दम पर मजबूती से डटे हुए हैं। 

माला के लिए पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जैसे दिग्गजों ने जनसभाएं की, जबकि प्रीतम के पक्ष में सचिन पायलट पहुंचे। हालांकि आचार संहिता लगने से पहले राहुल गांधी ने भी देहरादून में जनसभा की थी। फौजी बहुल सीट पर भाजपा राष्ट्रवाद के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है, तो कांग्रेस ने मोदी सरकार को राफेल पर घेर कर ‘न्याय’ का मरहम लगाया है।  

यह क्षेत्र रवाईं जौनसार, टिहरी क्षेत्र और देहरादून के मैदानी हिस्सों में बंटा है। रवाईं जौनसार क्षेत्र प्रीतम का अजेय दुर्ग माना जाता है, तो टिहरी में राजघराने की मजबूत पकड़ है। असल लड़ाई मैदान के विधानसभा क्षेत्रों में है, जहां 60 प्रतिशत मतदाता है। संगठनात्मक लिहाज से भले भाजपा मैदान में मजबूत दिख रही है, लेकिन 20 प्रतिशत अल्पसंख्यक मतदाता समीकरणों को प्रभावित सकते हैं। इन दोनों प्रत्याशियों के अलावा 13 और उम्मीदवार मैदान में हैं। 
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