तीन ओर से घने जंगलों से घिरे यमकेश्वर विकासखंड में एक बार फिर गुलदार का आतंक बना हुआ है। तल्ला ढांगू के कोटा गांव में छत पर सोए दर्जनभर लोगों के बीच से गुलदार जिस तरह एक दस साल के बच्चे को जबड़े में दबाकर भागा है, उससे क्षेत्र के लोगों में दहशत बनी हुई है।
सात महीने पूर्व यमकेश्वर के डाडामंडल क्षेत्र में गुलदार दो बच्चों को निवाला बना चुका है। तब वन विभाग ने उस गुलदार को आदमखोर घोषित कर उसे शिकारियों से गोली मरवाई थी। तब जाकर क्षेत्र में दहशत का माहौल खत्म हुआ था।
एक ओर लैंसडौन वन प्रभाग का आरक्षित वन क्षेत्र तो दूसरी ओर राजाजी नेशनल पार्क के घने जंगल से घिरे यमकेश्वर में मानव-वन्यजीव संघर्ष कोई नई बात नहीं है, लेकिन अब तक यह संघर्ष खेती के नुकसान और मवेशियों को निवाला बनाने तक ही सीमित था। अब गुलदार ने जंगलों से निकलकर घनी बस्तियों का रुख करना शुरू कर दिया है, जिससे ग्रामीणों के माथे पर चिंता की लकीरें पड़ना स्वाभाविक हैं।
जंगलों में पर्याप्त भोजन है
ग्रामीणों का कहना है कि राजाजी नेशनल पार्क और लैंसडौन के घने जंगलों में गुलदारों के लिए पर्याप्त भोजन मौजूद है, इसके बावजूद उनका बस्तियों का रुख करना खतरनाक है। यमकेश्वर की विधायक विजया बड़थ्वाल, यमकेश्वर के पूर्व प्रमुख प्रशांत बडोनी, जिला पंचायत सदस्य मीरा रतूड़ी ने कोटा के हमलावर गुलदार को आदमखोर घोषित करने की मांग सरकार से की है। कहा कि समय रहते कोई कदम नहीं उठाया गया तो लोग सड़कों पर उतरने के लिए विवश होंगे।
यमकेश्वर ब्लाक में गत वर्ष नवंबर माह में एक गुलदार दो मासूमों को अपना निवाला बना चुका है। तब विभाग ने गुलदार को नरभक्षी घोषित कर उसे मौत के घाट उतारना पड़ा। यमकेश्वर के साथ ही द्वारीखाल, दुगड्डा, नैनीडांडा, रिखणीखाल और जयहरीखाल विकासखंडों में गुलदार के साथ ही भालू का आतंक व्याप्त है।
इस वर्ष चार फरवरी को पौड़ी के कल्जीखाल के सरक्याणा गांव में घर के आंगन में खेलते हुए सात साल के बच्चे सुमित को गुलदार ने अपना निवाला बनाया था। 28 फरवरी को जहां गुलदार ने जयहरीखाल ब्लाक के ओडल गांव में दिनदहाड़े घर के पास से एक पांच साल की गौरी को निवाला बना डाला था, वहीं चार मार्च को लैंसडौन के पास जलेथा गांव में गुलदार साढ़े चार साल की आरुषि को भी निवाला बना चुका है।
गुलदार के हमले की घटनाएं
16 नवंबर, 2015-लैंसडौन वन प्रभाग के लालढांग रेंज में अमोला के जंगल में वन गुर्जर के चार साल के बेटे को आंगन से उठाकर गुलदार ने निवाला बना डाला।
23 नवंबर, 2015-लालढांग रेंज के यमकेश्वर क्षेत्र में धारकोट गढ़ाकोट गांव में आठ साल की मासूम संतोषी को निवाला बना डाला। वन विभाग ने इसे नरभक्षी घोषित कर मौत के घाट उतार दिया।
28 फरवरी, 2016-जयहरीखाल के ओडल गांव में गुलदार ने पांच साल की बच्ची केे बनाया निवाला।
04 मार्च, 2016- लैंसडौन के पास जलेथा गांव में साढ़े चार साल की बच्ची आरुषि को निवाला बनाया।
08 जून-2016 को दुगड्डा ब्लाक के मेरूवा गांव में तड़के शौच के लिए निकली वृद्धा श्यामा देवी को घर के आंगन में निवाला बनाया।