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चिकित्सा प्रमाणपत्र पर फर्जी होने पर होगी कार्रवाई

Wed, 27 Apr 2016 08:56 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, श्रीनगर
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यदि चिकित्सा प्रमाणपत्र मामले में आंचल डेरी (गढ़वाल दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ) के आरोप सच साबित हुए, तो दुग्ध उत्पादक संघ कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष अरुण शर्मा को भारी पड़ सकता है। प्रबंधन प्रमाणपत्र के फर्जी होने पर जालसाजी का मुकदमा करने के साथ ही कड़ी विभागीय कार्रवाई कर सकता है। इसके अलावा प्रमाणपत्र जारी करने वाला चिकित्सक भी शक के दायरे में है।  
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सूत्रों के अनुसार, प्रबंधन इस प्रकरण मेें सी. गंगाधर वर्सेज चेन्नई परिवहन विभाग को नजीर बना सकता है। उस प्रकरण में चेन्नई रोडवेज में कार्यरत सी गंगाधर का विभाग ने तबादला कर दिया था। तबादला होने पर गंगाधर एक हफ्ते के अवकाश पर चला गया। ड्यूटी ज्वाइन करने पर उसने चिकित्सा अवकाश का प्रार्थनापत्र और स्वास्थ्य प्रमाणपत्र जमा कराया। परिवहन विभाग ने प्रमाणपत्र फर्जी मानते हुए गंगाधर को बर्खास्त कर दिया। इसके विरुद्ध गंगाधर ने न्यायालय की शरण ली। न्यायालय ने भी फैसला सुनाते हुए हालांकि सजा को ज्यादा बताया, लेकिन साथ ही सजा देना भी जरूरी बताया।

वहीं शर्मा ने लगभग ढाई माह (25 अप्रैल 2015-5 जुलाई 2015) तक चिकित्सा अवकाश के लिए आवेदन किया हुआ है। उनके निलंबन में भी इस मामले को आधार बनाया गया है। डेरी के प्रधान प्रबंधक/सहायक निदेशक राम प्रसाद के अनुसार जिस अवधि में शर्मा ने चिकित्सा अवकाश मांगा है, उस दौरान उन्होंने उच्च न्यायालय मेेें अपने स्थानांतरण के विरुद्ध रिट याचिका और अपील दाखिल की। शपथ पत्र में उनके हस्ताक्षर हैं। इससे साबित होता है कि शर्मा उसे अवधि में स्वस्थ थे।  उन्होंने फर्जी तरीके से स्वास्थ्य प्रमाणपत्र बनाया है।  उन्होंने बताया कि शर्मा का आवेदन पत्र मेडिकल बोर्ड में लंबित है। इधर, अरुण शर्मा ने अपने ऊपर लगाए आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि कर्मचारियों के हित की लड़ाई लड़ने पर उन्हें परेशान किया जा रहा है।
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