कोटद्वार। लालढांग-चिल्लरखाल एलिवेटेड मार्ग निर्माण की मांग को लेकर जारी धरना-प्रदर्शन में शामिल क्षेत्रवासियों का सब्र जवाब दे गया। प्रदर्शनकारियों ने मांग को अनसुना करने पर रोष व्यक्त करते हुए खुद ही श्रमदान कर पुश्ता बनाया और मार्ग को समतल किया।
रविवार को संघर्ष समिति के आह्वान पर बड़ी संख्या में लोग और सामाजिक संगठनों के सदस्य गैंती, फावड़ा, बेलचा और तसला लेकर पहुंचे। सिगड्डी स्रोत नदी पर निर्माण कार्य शुरू करने से पहले भूमिया देवता की पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद जयकारों के साथ कार सेवा शुरू हुई। आंदोलनकारियों ने पत्थरों की चिनाई कर पुश्ता बनाया और मार्ग को समतल किया। कई स्थानों पर गड्ढे भरकर आम लोगों के आवागमन के लिए रास्ता खोला गया।
समिति अध्यक्ष देवेंद्र रावत ने कहा कि 26 साल बाद भी सरकार कोटद्वार, लालढांग और गढ़वाल के करीब आठ लाख लोगों को सुगम आवागमन के लिए सड़क उपलब्ध नहीं करा पाई है। वन्यजीव संरक्षण और जनहित के लिए एलिवेटेड मार्ग ही स्थायी विकल्प है। संयोजक रविंद्र सौंद ने वन भूमि को नियमों के तहत डिनोटिफाई कर लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित करने और पर्याप्त बजट जारी कर निर्माण शुरू कराने की मांग की।
मदन नेगी ने कहा कि वन सड़क क्षेत्रवासियों की समस्या का पूर्ण समाधान नहीं है। सूर्यास्त से सूर्योदय तक आवागमन और मालवाहक वाहनों पर प्रतिबंध की आशंका के चलते एलिवेटेड मार्ग जरूरी है। हेमा नेगी ने मार्ग को पौराणिक और आर्थिक, सामाजिक व सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।
इस मौके पर प्रवीन थापा, मधुसूदन नेगी, कृपाल गुसाईं, भीम सिंह नेगी, राजेंद्र सिंह रावत, धीरेंद्र सिंह नेगी, नारायण सिंह, शिवचरण सौंद, नरेंद्र सिंह, राजेश बुड़ाकोटी, मोहन सिंह नेगी मौजूद रहे।