देश के सभी 61 कैंट बोर्ड के उपाध्यक्ष का चुनाव मतदाताओं के मतदान से करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। रानीखेत, चकराता, के बाद लैंसडौन कैंट के नागरिकों ने उपाध्यक्ष का चुनाव मतदान से कराने की मांग की है।
भाजपा मंडल, जयहरीखाल के मीडिया प्रभारी मुकेश अग्रवाल, उत्तराखंड परिषद के सदस्य भुवनेश्वर खंडेलवाल ने रक्षा मंत्रालय को ज्ञापन प्रेषित किया। ज्ञापन में कहा कि 24 दिसंबर को महानिदेशक रक्षा संपदा ने सभी कैंट बोर्डों को भेजे गए सर्कुलर में कैंटोनमेंट के उपाध्यक्षों की शक्तियां बढ़ाने और तीन समितियों वित्त, शिक्षा, स्वास्थ्य का अनिवार्य गठन करने के आदेश दिए हैं। लेकिन सर्कुलर में उपाध्यक्ष के चुनाव सीधे मतदाताओं के जरिए करने का कहीं भी कोई उल्लेख नहीं हैं, जिससे जनता में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। उपाध्यक्ष का चुनाव सीधे न होने से कैंट चुनाव महज खानापूर्ति वाला बन कर रह जाएगा। भाजपा नेताओं ने कहा कि 2002 तक सिविल एरिया के पास मकानों के निर्माण को लेकर नक्शा पास करने व निरस्त करने की शक्तियां विद्यमान थी। वर्ष 2006 में हुए कैंट संशोधन में उपाध्यक्ष व सिविल एरिया कमेटी के अधिकार समाप्त कर सभी अधिकार सीईओ को दे दिए गए थे। जिससे कई तरह की समस्याएं पैदा होती गई। मांग की गई कि सिविल एरिया के मकानों के निर्माण व इनमें संशोधन के अधिकार सिविल एरिया कमेटी के पास होने चाहिए। सिविल क्षेत्र में उपाध्यक्ष के अधिकार बढ़ाये जाने से कई समस्याओं का समाधान होगा और कैंटों में चली आ रही कई तरह की समस्याओं से स्थानीय वाशिंदों को निजात मिल सकेगी।