लैंसडौन। छावनी परिषद लैंसडौन के छह वार्डों की मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य पूरा हो गया है लेकिन छावनी बोर्ड के चुनाव को लेकर अब भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। रक्षा मंत्रालय की ओर से चुनाव की तिथि घोषित नहीं किए जाने से लोगों में असमंजस बना हुआ है। हालांकि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के बाद जल्द चुनाव की उम्मीद जगी है।
छावनी परिषद के मुख्य अधिशासी अधिकारी हर्षित राज की ओर से इस संबंध में सार्वजनिक नोटिस जारी किया गया है। नोटिस के अनुसार मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या अन्य संशोधन के लिए निर्धारित अवधि में कोई आपत्ति प्राप्त नहीं हुई। इसके बाद मूल रूप से प्रकाशित निर्वाचन नामावली को बिना किसी परिवर्तन के आगामी आदेश तक प्रभावी रखा गया है। मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य 14 सितंबर को पूरा हुआ था।
देश की 56 छावनियों में पिछले कई वर्षों से निर्वाचित छावनी बोर्डों का गठन नहीं हो सका है। उत्तराखंड की लैंसडौन समेत नौ छावनियों में भी बोर्ड गठन लंबित है। वर्ष 2007 में पांच साल की अवधि के लिए चुनाव हुए थे। वर्ष 2012 के चुनाव छावनी अधिनियम में बदलाव की प्रक्रिया के चलते टाल दिए गए थे। इसके बाद 11 जनवरी 2015 को चुनाव हुए। फरवरी 2020 में प्रस्तावित चुनाव भी लंबित हो गए। बाद में बोर्डों का कार्यकाल बढ़ाया गया। 17 अप्रैल 2023 को चुनाव की तिथि तय किए जाने के बाद भी विभिन्न मांगों और छावनी अधिनियम में बदलाव की प्रक्रिया के चलते चुनाव नहीं हो सके।
लैंसडौन के मतदाता उषा नैथानी, लता खंडेलवाल, संजय कन्नौजिया और सुरेंद्र अग्रवाल ने रक्षा मंत्रालय से छावनी बोर्ड के चुनाव जल्द कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्वाचित बोर्ड के गठन से छावनी क्षेत्र में लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल हो सकेगी।