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वीर चक्र विजेता भूपाल सिंह पंचतत्व में विलीन

Tue, 05 Apr 2016 09:44 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, श्रीनगर
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Funeral - फोटो : Amar Ujala
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1948 के युद्धों में दुश्मनों के छक्के छुड़ाने और अपने साथी की जान बचाने वाले वीर चक्र विजेता लांस नायक स्व. भूपाल सिंह पुंडीर को लोगों ने अंतिम विदाई दी। उनके दोनों पुत्रों ने विनोद और दिनोर ने उनको अलकनंदा नदी के तट पर मुखाग्नि दी।
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टिहरी जिले के पाब गांव (बडियारगढ़)  निवासी 94 वर्षीय भूपाल सिंह का सोमवार को निधन हो गया था। तीसरी गढ़वाल राइफल्स में राइफलमैन के पद पर रहते हुए उन्होंने वर्ष 1948 में कई अभियानों में भाग लिया था।

18 मई 1948 को  त्रहगम पहाड़ी पर दुश्मनों के साथ हुए युद्ध में उन्होंने कई साथियों के शहीद होने पर मोर्चा संभालते हुए उनको आगे नहीं बढ़ने दिया। 17 जून 1948 को उनकी बटालियन ने मुसरगट्टी पहाड़ी में छिपे दुश्मनों को मार गिराया था। चार से अधिक दुश्मन उनकी गोली का शिकार बने।
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यहीं नहीं वह गोलाबारी में घायल अपने एक साथी को गोलियों की बौछार के बीच कंधे पर लादकर तीन मील दूर सुरक्षित स्थान पर ले आए। भूपाल की वीरता का सम्मान करते हुए भारत सरकार ने वर्ष 1948 में उन्हें वीर चक्र से नवाजा था।

मंगलवार को नौर गांव के नीच अलकनंदा नदी के तट पर स्व. भूपाल सिंह का अंतिम संस्कार हुआ। इस मौके पर प्रशासन की ओर से प्रभारी तहसीलदार सोहन सिंह बागड़ी मौजूद थे। युवा कांग्रेस के विधान सभा क्षेत्र के अध्यक्ष डा. प्रताप भंडारी, जिला पंचायत सदस्य उत्तम सिंह भंडारी, मणजूली के ग्राम प्रधान सौकार सिंह, खूंगचा के प्रधान जबर सिंह और हनुमंत भंडारी ने उनको श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
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