देवीखाल जुगरसैण मार्ग निर्माण को लेकर डीएफओ लैंसडौन का घेराव करते ग्रामीण।
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एक दशक से वन भूमि हस्तांतरण में फंसे देवीखाल-जुगरसैण-फतेहपुर मोटर मार्ग में लेट-लतीफी केे देखते हुए शुक्रवार को जुगरसैंण, मेरूवा, तल्ला रोहिणी, कोला, भ्यूलेत समेत आसपास के गांवों के लोगों ने लैंसडौन वन प्रभाग के डीएफओ दफ्तर पहुंचकर धरना-प्रदर्शन किया। इस मौके पर ग्रामीणों ने डीएफओ का घेराव कर उनकी सड़क का वन भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव को जल्द से जल्द भारत सरकार को भेजने की मांग की।
यमकेश्वर ब्लाक की पूर्व प्रमुख रेणू बिष्ट, जुगरसैंण की ग्राम प्रधान सुमित्रा देवी, सुनील ध्यानी समेत क्षेत्र के करीब पचास-साठ ग्रामीण शुक्रवार को लैंसडौन के डीएफओ के दफ्तर में एकत्र हुए। उन्होंने धरना-प्रदर्शन करते हुए वर्ष 2006 में स्वीकृत देवीखाल-जुगरसैण-फतेहपुर मोटर मार्ग के लिए वन भूमि हस्तांतरण को मंजूरी न मिलने पर नाराजगी जताई। कहा कि उत्तराखंड राज्य के बनने के सोलह साल बाद भी ग्रामीण पांच से सात किमी पैदल चलकर गांव पहुंचते हैं। कहा कि राज्य सरकार ने ग्राम पंचायत जुगरसैंण और मेरूवा समेत आसपास के सात गांवों को सड़क से जोड़ने के लिए दस किमी सड़क की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति प्रदान की थी। 22 सितंबर, 2009 को तत्कालीन विधायक ने सड़क का विधिवत शिलान्यास भी कर दिया लेकिन वन भूमि हस्तांतरण के प्रस्तावों में कई कमियां और खामियां रहने के कारण वर्ष 2011 में भारत सरकार ने इस प्रस्ताव को ही निरस्त कर दिया। अब एक बार फिर से वन भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव लोनिवि की ओर से भेजा गया है, जिसमें अनावश्यक देरी की जा रही है।
घेराव करने वालों में ललिता प्रसाद ध्यानी, सुरेंद्र बौंठियाल, विनोद ध्यानी, ओमप्रकाश ध्यानी, गोपालदत्त, विपिन ध्यानी, मोहन कुमार और अनिल कुमार आदि थे।
डीएफओ नितिशमणि त्रिपाठी ने ग्रामीणों को बताया कि लोनिवि की ओर से भेजे गए वन भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव में कई खामियां है। जिसे दूर करने के लिए उन्हें पत्र लिख दिया गया है। बताया कि लोनिवि की ओर से मूल प्रस्ताव और आनलाइन प्रस्ताव के वन भूमि रकबे में ही भिन्नता है, जिसे दुरुस्त करने, पौधरोपण के लिए चयनित स्थल का पुन: निरीक्षण करवाने के लिए लिखा गया है।