लैंसडौन वन प्रभाग की कोटद्वार रेंज के घराट क्षेत्र में स्थित वन गुर्जर के डेरों को आबादी क्षेत्र से दूर हटाने की मांग को लेकर क्षेत्रवासियों ने वन विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। विवाद की जड़ गुर्जर के डेरे से बरामद एक पशुपालक की गाय बताई जा रही है। गाय को गुर्जर के डेरे में देख ग्रामीण भड़क गए। इस दौरान लोगों ने गुर्जरों के डेरे में तोड़फोड़ कर डाली। सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी मौके पर पहुंचे। तय हुआ कि वन गुर्जर अपने परमिट वाले जंगल में ही डेरा बनाएंगे।
कोटद्वार रेंज के ग्वालगढ़ क्षेत्र में चार गुर्जरों के परमिट हैं। यहां उनके परिवार के लोग झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं। बताया जा रहा है कि दो दिन पहले वार्ड नंबर 19 के ध्रुवपुर निवासी एक पशुपालक की गाय लापता हो गई। पशुपालक अपनी गाय को तलाशते हुए गुर्जर के डेरे तक पहुंचे तो वहां गाय मिल गई। पशुपालक ने मामले की सूचना क्षेत्रीय पार्षद लीला कर्णवाल को दी। बताया गया कि गुर्जरों ने गाय के कान पर लगा टैग भी निकाल लिया जिससे खून बहने लगा था। गुस्साए ग्रामीणों ने आबादी से सटकर बनाए गए वन गुर्जरों के डेरे को हटाकर उनके परमिट वाले जंगल में भेजने की मांग वन विभाग से की। इस बीच वन विभाग ने गुर्जरों को ग्वालगढ़ के सटे सत्तीचौड़ के जंगल में डेरा बनाने को कहा लेकिन वहां के ग्रामीणों ने भी इसका विरोध शुरू कर दिया। देर शाम को वन गुर्जर और ग्रामीण डीएफओ लैंसडौन के कार्यालय में जमे रहे। इस बीच वन गुर्जर रुस्तम और उनके परिजनों ने ग्रामीणों और वन विभाग पर सर्दी के सीजन में उनके डेरे को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। कहा कि डेरे का स्थान बदलने के लिए समय लगेगा। क्षेत्रीय पार्षद लीला कर्णवाल ने कहा कि क्षेत्रवासियों के आक्रोश को देखते हुए वन विभाग से वन गुर्जर को संबंधित जंगल में आबादी से दूर जाने को कहा गया है।
ग्रामीणों के साथ हुए विवाद और आक्रोश को देखते हुए वन गुर्जर के परिवार और दूसरे गुर्जरों के डेरों में भेज दिया गया है। उन्हें अन्य गुर्जरों के डेरे के साथ ही रहने को कहा गया है। ग्रामीणों के साथ उभरे विवाद को सुलझा लिया गया है। - दिनकर तिवारी, डीएफओ लैंसडौन।