कोटद्वार। नैनीडांडा ब्लॉक के ग्राम पंचायत बखरोटी व कमेड़ा मल्ला के ग्रामीण एक हफ्ते से पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। स्थिति यह है कि ग्रामीण प्राकृतिक स्रोतों से सिर पर पानी ढोकर अपने हलक तर कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि दोनों ग्राम पंचायतों में जल जीवन मिशन के कार्य तीन साल बाद भी पूरे नहीं हो पाए हैं। जहां तीन गांवों में टंकियां नहीं बनी हैं। वहीं, अन्य गांवों में टंकियों से स्टैंड पोस्ट के कनेक्शन न होने के कारण ग्रामीण परेशान हैं।बखरोटी के पूर्व प्रधान सुरेंद्र सिंह रावत, महिपाल सिंह, बीरेंद्र सिंह, प्रेम सिंह, ध्यान सिंह, केशर सिंह, पान सिंह आदि ने बताया कि ग्राम पंचायत बखरोटी के बखरोटी व छीम पाणी गांव में पेयजल टंकियों का निर्माण कार्य आधा-अधूरा पड़ हुआ है। वही, छील गांव में पेयजल लाइन आपदा से ध्वस्त हो गई है। बसेड़ी के हिंवाड़ तोक में अभी तक जल जीवन मिशन के तहत कुछ भी कार्य नहीं हुआ है। बैडहाट गांव में पहाड़ी से भूस्खलन के कारण पाइप लाइन दब गई है। बिना जेसीबी के मलबा हटाना संभव नहीं है। घिरौली गांव में भी पेयजल आपूर्ति ठप है। ग्राम पंचायत कमेड़ा मल्ला के कमेड़ा मल्ला गांव में पेयजल लाइन भूमिगत नहीं होने से लाइन क्षतिग्रस्त है। इस गांव में भी एक हफ्ते से पेयजल आपूर्ति ठप है।
स्थिति यह है कि ग्रामीण बारिश का पानी एकत्र कर व आधे से दो किमी दूर प्राकृतिक स्रोतों से सिर पर पानी ढोकर अपने हलक तर कर रहे हैं। कहा कि इस संबंध में पेयजल निगम के अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। कहा कि कार्यदायी संस्था की ओर से लगातार ठेकेदार बदलने से स्थानीय श्रमिकों के पारिश्रमिक का भुगतान भी अभी तक नहीं हो पाया है।
आपदा से पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण बखरोटी व कमेड़ा मल्ला में पेयजल आपूर्ति ठप पड़ी हुई है। पेयजल लाइन की अस्थायी मरम्मत कर पेयजल आपूर्ति बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। साथ ही पेयजल लाइन की स्थायी मरम्मत के लिए आपदा मद में बजट की डिमांड भी की जा रही है।
- रमाकांत गुप्ता, एई पेयजल निर्माण निगम कोटद्वार।