जीआईसी जयहरीखाल में ग्रामीणों के साथ जी ब्लाक के ताले तोड़ते लैंसडौन के विधायक दिलीप रावत।
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जीआईसी जयहरीखाल बचाओ समिति के बनैर तले जीआईसी को अपने मूल भवन में शिफ्ट करने की मांग को लेकर जयहरीखाल के ग्रामीणों और अभिभावकों का आंदोलन 38 दिन से जारी है। बुधवार को क्षेत्रीय विधायक दिलीप रावत ने धरने को समर्थन दिया और ग्रामीणों के साथ जीआईसी जयहरीखाल पहुंचकर वहां कमरों के ताले तोड़ डाले। विधायक ने कहा कि अब यहीं जीआईसी का संचालन होगा और जल्द यहां कक्षाएं शुरू होंगी।
जीआईसी जयहरीखाल को आवासीय विद्यालय बनाया जाना था इसलिए इस स्कूल को तीन साल पहले सुभाष सदन में शिफ्ट कर दिया गया लेकिन यहां कम कमरे हैं और शौचालय की सुविधाएं नहीं हैं जिससे दिक्कतें हो रही हैं। ग्रामीण जीआईसी को अपने मूल भवन में शिफ्ट करने की मांग कर रहे हैं जबकि यहां कुछ निर्माण कार्य बचा हुआ है। बुधवार को क्षेत्रीय विधायक दिलीप रावत धरनास्थल पर पहुंचे और आंदोलनरत ग्रामीणों के साथ वार्ता की। इसके बाद उनके नेतृत्व में ग्रामीण जीआईसी जयहरीखाल पहुंचे। यहां मौजूद प्रभारी प्रधानाचार्य चंद्रमोहन नेगी से विधायक दिलीप रावत ने पूछा कि किसके आदेश पर विद्यालय भवन को आवासीय विद्यालय निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था को सौंपा गया। मेरे हस्तक्षेप के बाद विद्यालय और कार्यदायी संस्था के बीच एमओयू अब साइन हुआ है। बिना एमओयू के तीन वर्ष पूर्व कैसे निर्माण कार्य शुरू करवाया गया। इसके बाद विधायक के नेतृत्व में ग्रामीणों ने विद्यालय के कक्षों में लगे ताले तोड़ दिए। ग्रामीणों ने इसी भवन में जीआईसी संचालित करने की बात कही। विधायक ने प्रभारी प्रधानाचार्य को मूल भवन जी ब्लाक में ही जीआईसी संचालित करने के लिखित आदेश भी दिए हैं। इस मौके पर समिति के अध्यक्ष राजीव धस्माना, प्रवेश्वर कुकशाल, पीटीए अध्यक्ष निशा देवी, जेष्ठ उप प्रमुख अजय शंकर ढौंडियाल, ग्राम प्रधानी शिवानी देवी, धर्मेंद्र नेगी आदि मौजूद रहे। उधर, बीईओ जयहरीखाल अमित कुमार चंद्र ने कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी नहीं है। संबंधित प्रभारी प्रधानाचार्य से जानकारी ली जा रही है।
निर्माण कार्यों की होगी जांच
जीआईसी के आवासीय विद्यालय के निर्माण कार्यों पर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए। उन्होंने इसकी शिकायत विधायक दिलीप रावत से की। इस पर विधायक ने कहा कि आवासीय विद्यालय के निर्माण कार्यों की जांच करा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं विद्यालय के निर्माण कार्यों की जांच की है। जांच के दौरान लीपापोती और करोड़ों की धनराशि ठिकाने लगाने की बात सामने आई है।