कोटद्वार। सिद्धबली ट्रक यूनियन ने ऑल उत्तराखंड ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के आह्वान पर आवश्यक सेवा के वाहनों को छोड़कर अन्य ओवरलोडेड वाहनों का संचालन रुकवा दिया है। इस मौके पर प्रदेश सरकार से संगठन के मांगों का निराकरण करने की मांग की गई।
बुधवार सुबह यूनियन के पदाधिकारी सिद्धबली बैरियर के समीप एकत्र हुए। यहां उन्होंने यूनियन के अध्यक्ष दिनेश तड़ियाल के नेतृत्व में ओवरलोडेड वाहनों की आवाजाही को रुकवा दिया। पूरे दिनभर पदाधिकारी ओवरलोड ट्रकों को रुकवाते रहे। प्रदर्शनकारियों ने कहना है कि एक ओर जहां मालवाहक ट्रक स्वामियों को काम नहीं मिल पा रहा है, वहीं नेशनल परमिट पर चलने वाले ट्रक, मालवाहक वाहन मानकों के विपरीत संचालित हो रहे हैं। 12 टायर और उससे अधिक भार क्षमता वाले वाहनों का संचालन भी बिना किसी रोकटोक के हो रहा है।
स्थिति यह है कि ये वाहन स्टेट टू स्टेट ढुलान कर रहे हैं, जिससे स्थानीय मालवाहक वाहन स्वामियों और चालकों के समक्ष रोजगार का संकट उत्पन्न हो गया है। कहा कि पौड़ी नेशनल हाईवे पर बने पुलों की क्षमता 17 टन से अधिक नहीं है। जबकि ये वाहन 47 टन से अधिक माल लेकर आवाजाही कर रहे हैं। पुलिस व परिवहन विभाग की दोहरी मार भी स्थानीय वाहन स्वामियों पर ही पड़ रही है।
इस मौके पर प्रदेश सरकार से मांगों के निराकरण की मांग की गई। संगठन की प्रमुख मांगों में माल वाहनों के प्रवेश द्वारों पर धर्मकांटा लगाकर ओवर लोडिंग को रोकने, हिमाचल की तर्ज पर उत्तराखंड में भी 25 फीसदी जीबीडब्ल्यू बढ़ाने, खनिज पदार्थों का रवन्ना और रॉयल्टी गाड़ी के जीबीडब्ल्यू क्षमता के अनुसार जारी करने, भार वाहनों के चेकिंग का अधिकार सिर्फ परिवहन विभाग का हो, पुलिस उत्पीड़न बंद करने, आरटीओ मानकों के अनुरूप ही पर्वतीय क्षेत्रों में मालवाहक वाहनों के परिवहन की अनुमति देना शामिल है। इस मौके पर यूनियन के सचिव राजकुमार जोशी, कोषाध्यक्ष सुशील रावत, उपाध्यक्ष कुलदीप सिंह बिष्ट, सुरेंद्र सिंह रावत, संदीप अग्रवाल, राकेश भट्ट आदि चालक, परिचालक और वाहन स्वामी मौजूद रहे।