कोटद्वार। पुराने हरिद्वार मार्ग पर कलालघाटी (कण्वघाटी) और मवाकोट के बीच लोनिवि ने मलबा हटाकर मार्ग पर यातायात सुचारु करवा दिया है। मार्ग पर वाहनों की आवाजाही शुरू होने से क्षेत्रवासियों को सहूलियत मिल गई है। जुलाई और अगस्त के महीने में हुई भारी बरसात के कारण मार्ग पर मलबा आ गया था। मालन नदी वाले हिस्से में बने भारी गड्ढे होने से आवागन ठप पड़ा था। मार्ग पर यातायात सुचारु होने से क्षेत्रवासियों ने अमर उजाला को धन्यवाद दिया है।पुराने हरिद्वार मार्ग के 8.1 किमी वाले हिस्से को कण्वघाटी-मवाकोट-डिग्री कालेज मार्ग के नाम से जाना जाता है। जिस पर बरसात के दौरान मालन नदी वाले हिस्से में मलबा आने और गड्ढे पड़ने से आवाजाही ठप पड़ी थी। क्षेत्रवासी बरसात बंद होने के बाद से ही इस मार्ग का मलबा साफ करने और मार्ग को समतल कर यातायात बहाल करने की मांग लोनिवि से कर रहे थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। अमर उजाला ने 24 नवंबर के अंक में इस खबर को प्रमुखता के साथ ''''कलालघाटी मवाकोट मार्ग से बरसात का मलबा हटाना भूला लोनिवि'''' शीर्षक से प्रकाशित किया। खबर प्रकाशित होने के बाद हरकत में आए लोनिवि दुगड्डा ने जेसीबी से सड़क का मलबा हटाया, वहीं नदी वाले हिस्से को भी समतल कर वाहनों की आवाजाही लायक बनाया। जिससे अब इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है।
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पुल निर्माण की मांग पकड़ने लगी जोर
क्षेत्रवासी अब इस मार्ग पर पड़ने वाली मालन नदी में पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं। कहा कि मोटाढाक और हल्दूखाता मार्ग पर मालन पुल के टूटने के बाद कलालघाटी मवाकोट के बीच पुल निर्माण की जरूरत है। यदि यहां पर पुल बन गया होता तो यह भाबर की 50 हजार की आबादी का बेहतर विकल्प होता। समाज सेवी दिनेश गौड़, अशोक कुमार गौड़, जगदंबा उनियाल, कीरत सिंह, जेपी बहुखंडी का कहना है कि अब सरकार को कलालघाटी और मवाकोट के बीच मोटर पुल का जल्द से जल्द निर्माण करवाना चाहिए।
डिग्री कॉलेज-मवाकोट-कलालघाटी मार्ग पीएमजीएसवाई से लोनिवि को हस्तांतरित हुआ है। बरसात से हुए नुकसान और इस पर नए सिरे से डामरीकरण के लिए 6.98 करोड़ का आगणन बनाकर शासन को भेजा गया है। फिलहाल बरसात का मलबा हटाकर आवाजाही सुचारु करवा दी गई है।
-निर्भय सिंह, अधिशासी अभियंता लोनिवि दुगड्डा।