श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की झील के किनारे ग्राम पंचायत धारी के थैलीसैंण तोक में अलकनंदा नदी का जल स्तर बढ़ने पर 11 मकान डूब गए। हालांकि इनमें वर्षों से कोई नहीं रहता था। पीड़ितों ने परियोजना संचालन कर रही कंपनी एएचपीसीएल पर गांव को डुबोने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कंपनी ने न तो मुआवजा दिया और न ही उनका पुनर्वास किया।
कीर्तिनगर तहसील के थैलीसैंण तोक में अनुसूचित जाति के परिवार निवास करते थे। श्रीनगर जल विद्युत परियोजना के निर्माण के लिए कंपनी ने उनकी नापभूमि अधिग्रहीत की। धारी देवी मैती समिति के सचिव भीमलाल ने बताया कि कंपनी ने वर्ष 2008 में उनकी जमीन लेकर उनको बेघर कर दिया। परियोजना झील में पानी भरने पर उन्होंने कुछ साल पहले अपने घर छोड़ दिए। अब वह नदी के ठीक सामने कलियासौड़ में अपने खर्चे से मकान बना रहे हैं। प्रभावित दुर्गालाल, अनूसूया, किशोरी, दिनेश, रमेश, संपदा देवी, राजी देवी, सुशीला, सोहन और राजेंद्र ने बताया कि कंपनी ने अनुबंध किया था कि उनका पुनर्वास किया जाएगा, लेकिन आज तक उन्हें एक धेला नहीं मिला। वह थैलीसैंण में कभी-कभार रहने भी जाते थे। वहां खेती की हुई थी। शुक्रवार को सब कुछ नष्ट हो गया। दिन में झील का जल स्तर अचानक बढ़ने से देखते ही देखते सारे मकान पानी में डूब गए।
कंपनी के अधिकारी इस संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं दे रही है। कंपनी के जनसंपर्क अधिकारी वाईआर शर्मा का कहना है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। साइट इंचार्ज बता सकते हैं, जबकि साइट इंचार्ज सत्यजीत खंडूड़ी का कहना है कि इसकी जानकारी शर्मा ही दे सकते हैं। इधर, राजस्व उपनिरीक्षक उपेंद्र दत्त पांडे का कहना है कि थैलीसैंण तोक को यहां के निवासी 8-10 साल पहले छोड़ चुके हैं। यहां करीब आठ टीन शेड थे, जिनमें से कुछ पहले ही कटाव की जद में आ चुके थे। कुछ टीन शेड शुक्रवार को कटाव की जद में आए हैं। यहां के निवासी कलियासौड़ में रह रहे हैं।