कार्बेट नेशनल पार्क के ढेला रेंज में बाघ और हाथी के बच्चे के बीच हुए संघर्ष में मादा हाथी की मौत हो गई है। मादा हथिनी की उम्र दस से बारह वर्ष के बीच आंकी गई है।
बाघों ने हाथी के बच्चे को मौत के घाट उतारने के बाद अपना निवाला भी बना लिया है। हाथी के शिकार का यह मामला विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। वन विभाग के कैमरा ट्रेप में बाघों के हाथी के बच्चे को मारने और निवाला बनाने का दृश्य कैद हुआ है। वन अधिकारियों ने मामले की पुष्टि की है।
मशहूर शिकारी जिम कार्बेट ने अपनी किताबों में अपना अनुभव बताया कि बाघ हाथी को खा जाते हैं। आमतौर पर ऐसा कम ही देखने और सुनने को मिलता है लेकिन दो दिन पूर्व कालागढ़ उपखंड के ढेला रेंज में ऐसा ही एक मामला प्रकाश में है। जब हाथी के 10-12 साल के मादा बच्चे को बाघों ने मार कर खा लिया। कालागढ़ के उपप्रभागीय अधिकारी आरके तिवारी ने इसकी पुष्टि की। बताया कि कैमरा ट्रैप से लिए फोटो में इस बात की पुष्टि हुई है। बताया कि कैमरे में बाघ हाथी को खाते हुए देखे गए हैं। ढेला कक्ष संख्या दो में हुई इस घटना के बाद से हाथी झुंड के आक्रोशित होने की आशंका बनी है। इलाके पर निगरानी रखी जा रही है।
बाघों से हाथियों के बच्चों को बचाने की चुनौती
उप प्रभागीय वनाधिकारी आरके तिवारी बताया कि बाघ व हाथी संघर्ष में हाथी की जान जाने के बाद उसे बाघ खा गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि हाथी के बच्चे की जान दो से अधिक बाघों ने ली होगी। घटनास्थल के आसपास बीस मीटर के घेरे की सघन कांबिंग की गई तो 16 जगह बाघों की मौजूदगी के निशान मिले हैं। आशंका यह जताई जा रही है कि बाघ बाघिन के जोड़े और उसके बच्चों ने मादा हाथी की जान ली है।
कालागढ़ रेंज के धारा, झिरना और ढेला में हर दिन पर्यटकों को दो से तीन बाघों की साईटिंग हो रही है। यहां बाघों की अधिकता है। बाघों से हाथियो को बचाने की चुनौती के लिए उच्च अधिकारियों को लिखा जाएगा।
फोटो- कार्बेट नेशनल पार्क के ढेला रेंज में हाथी के बच्चे को खाते हुए बाघ।