चौरास क्षेत्र में सिंचाई के लिए लगाए गए नलकूप वर्ष 2013 की आपदा के बाद से सूखे पड़े हैं। सिंचाई नहीं होने से यहां काश्तकारों की सिंचित भूमि ऊसर में तब्दील हो रही है। जबकि कई काश्तकारों की सैकड़ों हेक्टेयर भूमि बंजर हो चुकी है। काश्तकारों का कहना है कि नलकूपों की मरम्मत के लिए विभागीय अधिकारियों से कई बार आग्रह करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। वहीं विभागीय अधिकारियों का कहना है कि नलकूप ठीक कर दिए गए है, लेकिन विद्युत कनेक्शन नहीं होने से वह संचालित नहीं हो पा रहे हैं।
विकासखंड कीर्तिनगर के देवली, मंगसू व नौर में कृषि भूमि की सिंचाई के लिए विभाग ने अस्सी के दशक में क्षेत्र में तीन नलकूप लगा थे। इन नलकूपों से जाखणी, घिल्डियालगांव, देवली, रानीहाट, नैथाणा, मंगसू, नौर, गारेरसाली आदि ग्राम पंचायतों के काश्तकारों की भूमि की सिंचाई होती थी। वर्ष 2013 में आपदा के दौरान अलकनंदा का जल स्तर बढ़ने से सभी नलकूप क्षतिग्रस्त हो गए थे।
आरोप है कि तब से इन नलकूपों की मरम्मत नहीं कराई गई है। प्रधान संगठन के अध्यक्ष वासुदेव भट्ट का कहना है कि खराब पड़े नलकूपों की मरम्मत के लिए विभागीय अधिकारियों से कई बार शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। घिल्डियाल गांव के प्रधान आशुतोष रावत ने कहा कि गांव में अधिकांश लोग खेती पर निर्भर हैं। सिंचाई न होने से पैदावार घट गई है। वहीं नलकूप विभाग के एसडीओ मनोज कुमार ने बताया कि नलकूपों की मरम्मत कर दी गई है, लेकिन विद्युत कनेक्शन के लिए बजट न होने से पंप संचालित नहीं हो पा रहे हैं। बजट उपलब्ध होते ही नलकूप संचालित कर दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि नौर गांव में इसी माह से एक नलकूप संचालित करने का प्रयास किया जा रहा है।