यमकेश्वर ब्लाक के तल्ला ढांगू क्षेत्र के कोटा गांव में गुलदार की दहशत के चलते अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजने से कतराने लगे हैं। आबादी से दूर स्थित स्कूल को पंचायतघर में शिफ्ट करने के बाद भी अभिभावक बच्चों की सुरक्षा के प्रति खतरा नहीं उठाना चाह रहे हैं।
हाल यह है कि गांव के दूरस्थ तोक से आने वाले कई बच्चे गैरहाजिर चल रहे हैं, वहीं तीन बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं। उधर, राजाजी पार्क प्रशासन ने गुलदार को आदमखोर घोषित करने के बाद गांव में दोबारा शूटर नहीं भेजा है, जिससे ग्रामीणों में पार्क प्रशासन के प्रति रोष बना हुआ है।
कोटा गांव में बीती आठ जुलाई को स्कूल परिसर में गुलदार के धमकने से गांव के लोग दहशतजदा हैं। सुरक्षा की दृष्टि से स्कूल की कक्षाएं आबादी के पास पंचायत भवन में चलाई जा रही हैं। शिक्षक और बच्चे टोली बनाकर स्कूल आ-जा रहे हैं, लेकिन गांव के दूरस्थ तोक से अकेले आने वाले बच्चों को खतरा बना हुआ है। दहशत के चलते कक्षा चार से अमन, कक्षा तीन से सपना और किरण अब तक नाम कटवा चुके हैं। कक्षा तीन में पढ़ने वाली किरण पुत्री कुलदीप सिंह गांव के उमरसैण तोक से अकेले ही स्कूल आती थी। किरण के पिता ने बताया कि गांव में गुलदार का खतरा बना हुआ है, ऐसे में वह भी लड़की को स्कूल नहीं भेज सकते।
मजबूरी में उसे अब रिश्तेेदारों के पास भेजना पड़ रहा है। प्रधानाध्यापिका अंजना रतूड़ी ने बताया कि उन बच्चों के लिए सबसे अधिक खतरा बना हुआ है जो कि दूर के गांव से पैदल चलकर स्कूल में आते हैं। भय के चलते शिक्षक और बच्चे टोली बनाकर चल रहे हैं। विद्यालय की छात्र संख्या भी घटने लगी है। अब तक तीन बच्चे स्कूल छोड़कर जा चुके हैं। दूर से आने वाले कई बच्चे लगातार गैरहाजिर चल रहे हैं।
जिला प्रशासन के निर्देश के बावजूद राजाजी नेशनल पार्क प्रशासन ने गांव में दोबारा शूटर नहीं भेजा है। प्रधान प्रभा देवी, ग्रामीण राजपाल सिंह ने बताया कि पार्क प्रशासन ने गुलदार को आदमखोर घोषित करने के बाद चुप्पी साध ली है, जिससे गांव में अनहोनी की आशंका बनी है।
आदमखोर गुलदार को शूट करने के लिए राजाजी नेशनल पार्क की निदेशक को जल्द गांव में शूटर भेजने के लिए निर्देशित किया गया है। जिला प्रशासन ग्रामीणों की हरसंभव मदद करेगा।
-चंद्रशेखर भट्ट, जिलाधिकारी गढ़वाल