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Kotdwar News: झंडीचौड़ में नहीं थम रहा हाथियों का आतंक, गेहूं की फसल रौंदी

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कोटद्वार। भाबर क्षेत्र के अंतर्गत वार्ड नंबर-37 पश्चिमी झंडीचौड़ में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार रात को हाथियों के झुंड ने कई काश्तकारों की गेहूं की फसल रौंद डाली। क्षेत्र के काश्तकारों ने उन्हें फसलों की क्षति का मुआवजा देने और क्षेत्र में वन कर्मियों की गश्त बढ़ाने की मांग की है।
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पार्षद सुखपाल शाह ने बताया कि क्षेत्र में 15 दिनों से हाथियों का आतंक बना हुआ है। शुक्रवार रात को डेढ़ बजे के करीब भी सात हाथियों का झुंड आबादी क्षेत्र में घुस गया। हाथियों ने महेंद्र सिंह, कल्पेश्वरी देवी, शिव सिंह, नरेंद्र सिंह, धर्म सिंह समेत अन्य काश्तकारों के खेतों में खड़ी गेहूं की फसल रौंद डाली। कहा कि शाम ढलते ही हाथी आबादी क्षेत्र में धमक रहे हैं, जिससे जानमाल का खतरा भी बना हुआ है। क्षेत्र के काश्तकार लंबे समय से हाथी सुरक्षा दीवार बनाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। कहा कि एक ओर जहां केंद्र सरकार काश्तकारों की आय बनाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश सरकार और वन विभाग काश्तकारों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रहा है। कहा कि वन विभाग से कई बार काश्तकारों को गांधी बंदूक, पटाखे, टॉर्च आदि उपलब्ध कराने की मांग की गई, लेकिन काश्तकारों को अभी तक यह चीजें भी उपलब्ध नहीं कराई गईं। कहा कि पश्चिमी झंडीचौड़ वार्ड में 90 फीसदी से अधिक लोगों की आजीविका खेती-बाड़ी पर निर्भर है। जंगली हाथी उनकी पिछले चार माह की पूरी मेहनत पर पानी फेर रहे हैं, जिससे क्षेत्र के काश्तकारों के समक्ष आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने वन विभाग से प्रभावित काश्तकारों को मुआवजा देने और हाथियों के बढ़ते उत्पात पर अंकुश लगाने की मांग की है।
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