गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार के मोटर नगर में आधुनिक बस अड्डा के नाम पर जनता को धोखा मिला है। शासन-प्रशासन और नगर निगम की उदासीनता के चलते सात साल बाद भी शहर में बस अड्डा नहीं बन सका है। हाल यह है कि बस अड्डा की जगह पर कार्यदायी एजेंसी ने बड़ा गड्ढा खोदकर छोड़ दिया है। जो अब वाहनों की पार्किंग के काम का भी नहीं आ रहा है।
पूर्व की नगर पालिका परिषद ने जनता को मोटर नगर में आधुनिक बस टर्मिनल बनाने का सपना दिखाकर 2013 में पीपीपी मोड पर इसका कार्य एक निजी संस्था को सौंपा था। संस्था ने बस अड्डे का निर्माण कार्य शुरू तो किया, लेकिन कुछ समय बाद बड़ा गड्ढा बनाकर अधर में छोड़ दिया। अनुबंध के मुताबिक मार्च, 2014 तक बस अड्डे का निर्माण पूर्ण कर नगर पालिका को सौंपा जाना था। लेकिन, सरकारी मशीनरी की लेटलतीफी के कारण कभी भूउपयोग परिवर्तन तो कभी वहां बनी दुकानों को हटाने के नाम पर कई साल गुजर गए। अब कार्यदायी एजेंसी मौके पर आधा अधूरा स्ट्रक्चर खड़ाकर चलती बनी। नगर पालिका अब नगर निगम में उच्चीकृत हो चुकी है, लेकिन एक साल से नगर निगम भी हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
क्षेत्रीय जनता और परिवहन कंपनियों का कहना है कि उन्हें बस अड्डे के नाम पर ऐसा गड्ढा मिला है जो अब किसी काम का नहीं रह गया। गढ़वाल जीप टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष अमरजीत सिंह रावत का कहना है कि इससे अच्छा तो यह पहले ही था। यहां पर वाहनों की पार्किंग तो होती ही थी, बस अड्डा भी चल रहा था। अब वाहन सड़कों पर खड़े करने पड़ रहे हैं। जिससे जाम की स्थिति बनी रहती है।
सिताबपुर इंडस्ट्रियल एरिया से मिली थी मोटर नगर की जमीन
1957 में सिताबपुर में जिला उद्योग केंद्र का इंडस्ट्रियल एरिया खोला गया। वर्ष 1976 में इंडस्ट्रियल एरिया से 1.838 हेक्टेयर भूमि नगर पालिका को दी गई। नगर पालिका की यह भूमि वर्षों तक बंजर पड़ी रही। यहां छोटे-बड़े वाहनों की पार्किंग होती थी। राज्य गठन के बाद आबादी का घनत्व तेजी से बढ़ा और सड़कों पर यातायात का दबाब बढ़ने लगा। आए दिन के जाम को देखते हुए वर्ष 2010 में औद्योगिक स्थान की दीवार को तोड़कर मोटर नगर में दुकानें बनाई गई और पटेल मार्ग स्थित कुछ दुकानों को वहां शिफ्ट कर दिया गया। प्रशासन ने नया ट्रैफिक प्लान बनाकर यहां से पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों के लिए जीप-टैक्सियों और जीएमओयू की बसों का संचालन करवाया। अब सात साल से यहां पर आधुनिक बस अड्डे के नाम पर गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है।
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कार्यदायी संस्था का अनुबंध समाप्त करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में चल ही रही थी, संस्था ने डीजे कोर्ट देहरादून में याचिका डाल दी है। मामला कोर्ट में विचाराधीन है।
-राजेश नैथानी, सहायक नगर आयुक्त कोटद्वार