हरिद्वार। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय को फिलहाल राहत मिल गई। इस बार बकाया जनवरी और फरवरी माह का वेतन शासन ने कुलपति और कुल सचिव का वेतन रोकते हुए अन्य का जारी कर दिया। इस मद में कुल नौ करोड़ पचास लाख रुपये अवमुक्त किए गए हैं। इसमें शर्त लगा दी गई है कि यदि इसका अनावश्यक रूप से उपयोग किया गया तो अगली बार सभी का वेतन रुकेगा।
फिलहाल शासन के इस निर्णय से सभी प्रसन्न हैं। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के शिक्षणेत्तर कर्मियों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि अनावश्यक रूप से उन्हें परेशान किया जा रहा था। अब इस निर्णय से दोषी लोग ही जांच के दायरे में आएंगे।
बता दें कि पूर्व में उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में वेतन आदि मद में मिले रुपयों को मनमाने तरीके से खर्च किया गया। यही नहीं कई उपनल और पीआरडी के कर्मचारियों को इतनी धनराशि दे दी गई जो नियमावली में थी ही नहीं। इस मामले में शासन ने जांच बैठाई और हालत यह रही कि शासन ने वेतन मद को ही अवरुद्ध कर दिया।
पांच से छह माह तक वेतन नहीं मिलने की स्थिति में कर्मचारियों ने व्यापक आंदोलन की शुरुआत की और जिम्मेदार अधिकारियों को वेतन रोकते हुए नियमित कर्मचारियों के वेतन की भुगतान की मांग की थी। इसका संज्ञान लेते हुए शासन ने सहायक अनुदान धनराशि स्वीकृत किया।