गढ़वाल दुग्ध उत्पादक संघ (आंचल डेरी) के अधीन कालागढ़ दुग्ध अवशीतन केंद्र में अनियमिताओं व अव्यवस्थाओं के मामले में प्रधान प्रबंधक व केंद्र प्रभारी के ऊपर गाज गिर गई है। डेरी विकास विभाग के निदेशक ललित मोहन रयाल ने दोनों अधिकारियों के निलंबन के आदेश जारी करने के साथ ही विस्तृत जांच भी बैठा दी है। वहीं, डेरी विकास विभाग पौड़ी के सहायक निदेशक राम प्रसाद को प्रधान प्रबंधक की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। निदेशक के आदेश मिलने के बाद 16 दिनों से हड़ताल कर रहे कर्मचारियों ने बुधवार से काम पर लौटने का निर्णय लिया है।
11 महीनों का वेतन भुगतान, राजकीयकरण, प्रधान प्रबंधक को हटाने व घी चोरी व कालागढ़ में अपमिश्रित दूध प्रकरण की जांच की मांग के लिए कर्मी 28 मार्च से आंदोलित थे। कर्मचारियों ने दुग्धशाला व कार्यालय में काम करना बंद कर दिया था। कर्मचारियों की मांग पर डेरी विकास विभाग के उप निदेशक जयदीप अरोड़ा ने कालागढ़ केंद्र का निरीक्षण किया।
निदेशक रयाल ने बताया कि उप निदेशक की निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार केंद्र में कई प्रकार की अनियमितताएं और अव्यवस्थाएं हुई हैं। रिपोर्ट में मुख्य रूप से केंद्र प्रभारी केपी सिंह और प्रधान प्रबंधक जीएस मौर्य को दोषी माना गया है। दोनों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए सहायक निदेशक कार्यालय पौड़ी से संबद्ध कर दिया गया है। विस्तृत जांच के लिए यूसीडीएफ के सामान्य प्रबंधक दीप प्रकाश बिष्ट को जांच अधिकारी नामित किया गया है।
कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष अरुण शर्मा ने बताया कि प्रधान प्रबंधक को हटाने की मुख्य मांग पूरी हो गई है। साथ ही अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई है। इसलिए बुधवार से काम पर वापस लौटने का निर्णय लिया गया है।
प्लांट की चिमनी पर चढ़ा कर्मचारी
श्रीनगर। ग्यारह माह से वेतन नहीं मिलने पर आर्थिक तंगी से जूझ रहे तोताराम कुकरेती मंगलवार सुबह करीब 10 बजे ब्वायलर प्लांट की चिमनी पर चढ़ गए। उनका कहना था कि वेतन नहीं मिलने से वह अपने बच्चों की पढ़ाई जारी रखने में असमर्थ हो रहे हैं। साथ ही परिवार की जरूरतों को भी पूरा नहीं कर पा रहे हैं। शाम करीब चार बजे निदेशक से मांगों के संबंध में कार्रवाई करने का पत्र मिलने पर तोताराम चिमनी से नीचे उतर गए। इस दौरान एसडीएम रजा अब्बास, तहसीलदार चौधरी वेदपाल सिंह व पुलिस बल मौजूद था।