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देशसेवा का जज्बा जागा तो परिवार की नहीं सुनी

Sat, 24 Sep 2016 10:16 PM IST
भुवन उपाध्याय/अमर उजाला, उत्तरकाशी
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लेफ्टिनेंट महिमा रावत को ओटीए चेन्नई में पीओपी सेरेमनी के बाद बैच लगाते मां सुमित्रा रावत और पिता गिरीश चंद्र सिंह रावत। - फोटो : Amar Ujala
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 देश सेवा का जज्बा जागा तो शिक्षक परिवार की बेटी ने आर्मी में जाने के लिए परिवार से ही बगावत कर दी। मां-पिता ने शिक्षा विभाग की नौकरी करने को कहा, लेकिन नाना और मामा से आर्मी के बारे में बचपन से सुनती आ रही पौड़ी जिले के विकास मार्ग निवासी महिमा रावत ने आर्मी में जाने की ठानी। आफिसर प्रशिक्षण अकादमी चेन्नई से 11 माह का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद पासिंग आउट परेड पूरी कर लेफ्टिनेंट महिमा रावत पौड़ी पहुंची हैं। अक्तूबर में फिरोजपुर, पंजाब में उनकी पहली ज्वाइनिंग है।
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बचपन से मेधावी महिमा ने 12वीं की परीक्षा सेंट थामस स्कूल पौड़ी से वर्ष 2012 में 94 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री वेंकटेश्वर कालेज से फिजिक्स ऑनर्स किया। डीयू में ही वर्ष 2015 में एमएससी फिजिक्स में प्रवेश किया। इसी दौरान आर्मी में जाने की ललक के चलते महिमा ने सीडीएस का फार्म खरीद लिया। इस दौरान पौड़ी में रह रहे शिक्षक पिता गिरीश चंद्र सिंह रावत और शिक्षिका मां सुमित्रा रावत ने सीधे-सीधे मना कर दिया और शिक्षा विभाग की नौकरी करने की बात कही।

अपने नाना कोर ऑफ सिग्नल से सेवानिवृत्त सूबेदार खुशहाल सिंह बिष्ट और मामा लेफ्टिनेंट कर्नल हरीदर्शन सिंह बिष्ट (रिटा.) से प्रभावित महिमा ने मां-पिता के फरमान की परवाह किए बिना सीडीएस का फार्म भर दिया। पहली ही बार में महिमा ने जुलाई 2015 को सीडीएस की परीक्षा पास कर ली। ओटीए चेन्नई में 11 माह की ट्रेनिंग के बाद दस सितंबर को पीओपी हो गई। बतौर डिफेंस आफिसर महिमा अक्तूबर में फिरोजपुर, पंजाब में पहली ज्वाइनिंग देगी।
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