इस बार के मानसून सत्र में अतिवृष्टि और बादल फटने की घटनाओं ने कोटद्वार तहसील में दो लोगों और लैंसडौन तहसील में एक की जान ली। प्रशासन की मानें तो तीनों मृतकों के आश्रितों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।
आपदा में जान-माल के साथ ही पशु और खेती को नुकसान पहुंचा है। कोटद्वार और यमकेश्वर तहसील में अभी तक राजस्व और कृषि विभाग खेती को हुए नुकसान का सर्वे नहीं करा सका है, वहीं लैंसडौन तहसील क्षेत्र में करीब 400 हेक्टेयर भूमि बहने से किसानों को फसल और जमीन दोनों की क्षति झेलनी पड़ी है।
इस बार जून मध्य से ही बारिश का सिलसिला शुरू हो गया था। जुलाई और अगस्त के दो महीने भी मानसून जमकर बरसा। कहीं बादल फटे तो कहीं अतिवृष्टि हुई। आपदा से जान-माल, मवेशी और खेतीबाड़ी भी चपेट में आई। कोटद्वार तहसील प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार इस बार की आपदा ने दो लोगों की जान ली। पहली घटना में 27 जून को कोटद्वार-दुगड्डा के बीच पांचवें मिल के रपटे के उफान पर रहने से एक बाइक सवार की मौत हुई, वहीं एक अगस्त को पुलिंडा गांव में पुश्ता ढहने से एक किशोर की मौत हुई थी।
जान-माल के इन दोनों मामलों में तहसील प्रशासन की ओर से मृतक आश्रितों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता की संस्तुति की गई है। पहली घटना में मारे गए बाइक सवार रविंद्र सिंह निवासी रिठेल गांव तहसील चौबट्टाखाल के आश्रितों को चार लाख रुपये की सहायता प्रदान कर दी गई है।
कोटद्वार तहसील में आपदा से हुए नुकसान में खेती को हुए नुकसान का अभी सर्वे नहीं हो सका है। नौ मकानों को आपदा से नुकसान दर्ज किया गया है। यमकेश्वर तहसील में इस बार की आपदा से एक मकान पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त और छह भवनों को आंशिक क्षति पहुंची है।
लैंसडौन तहसील में गत 12 अगस्त को उफान पर रही मंदाल नदी ने बरई गांव के निवासी दसवीं के छात्र विशाल की जान ली थी। तहसील में जहां आपदा ने एक दर्जन मवेशियों को काल के गाल में समा दिया, वहीं 15 परिवारों को बेघर कर दिया। पट्टी तल्ला बदलपुर के बोरगांव में बादल फटने से 14 काश्तकारों की 385 हेक्टेयर सिंचित जमीन बह गई।
यहीं नहीं, यहां कई नाली असिंचित जमीन भी मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित परिवारों को शासनादेश के मुताबिक आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।