कोटद्वार। राज्य गठन को हुए 24 साल हो गए हैं, लेकिन कोटद्वार को जिला बनाने समेत शहर के लिए की गई घोषणाएं धरातल पर नहीं उतर सकीं है। मोटर नगर बस अड्डा, मेडिकल कॉलेज, क्षेत्र की लाइफ लाइन चिलरखाल लालढांग मार्ग व कंडी मार्ग निर्माण समेत कई ऐसी घोषणाएं हैं, जो कई अब तक आई सरकारों के कई मुख्यमंत्रियों की ओर से की गई, लेकिन धरातल पर नहीं उतर सकी। देश के विभिन्न भागों से आए पर्यटकों के लिए यहां समुचित पार्किंग तक की सुविधाएं नहीं है, जिससे यहां का पर्यटन विकास भी लैंसडौन के भरोसे चल रहा है।
कोटद्वार में एक ही स्थान पर रेलवे स्टेशन, रोडवेज बस अड्डा और उत्तराखंड की सबसे बड़ी निजी परिवहन कंपनी जीएमओयू का मुख्यालय व बस अड्डा है, लेकिन जो हालात अविभाजित यूपी के समय यहां थे, कमोवेश अब भी वही हैं। इसमें बदलाव केवल इतना है कि अमृत भारत योजना के तहत रेलवे स्टेशन का पुनर्निर्माण गतिमान है और अविभाजित यूपी सरकार के समय पर वर्ष 1952 में बने रोडवेज बस अड्डे के भवन को नया बनाने की कवायद चल रही है।
राज्य गठन के बाद राज्य सरकार ने भाबर के ग्रामीण अंचल की 35 ग्राम पंचायतों के 73 राजस्व गांवों को नगर पालिका में शामिल करते हुए नगर निगम बना दिया, जिससे खेती बाड़ी वाले ग्रामीणों की सुविधाओं के बजाय परेशानी ज्यादा होने लगी है। मुख्य बाजार में सड़कों पर अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान तो चले, लेकिन हटाए गए अतिक्रमण वाली जगहों पर फुटपाथ नहीं बन सके। देवी रोड स्थित मोटर नगर में अत्याधुनिक बस अड्डे व शॉपिंग काम्पलेक्स के नाम पर वर्ष 2013 से गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है, जो जस का तस अधर में लटका हुआ है। लोगों का कहना है कि मोटर नगर यदि पहले जैसा रहता तो कम से कम पार्किंग और बसों को खड़ी करने की जगह तो मिलती। अब यहां खोदा गया गड्ढा किसी काम का नहीं रह गया है।
नागरिक मंच के अध्यक्ष चंद्रप्रकाश नैथानी व महामंत्री अतुल भट्ट का कहना है कि कोटद्वार गढ़वाल का प्रमुख शहर है। यहां से लोग पहाड़ व मैदानी रूटों से आवाजाही करते हैं। अभी तक यहां पार्किंग तक की सुविधा नहीं है। अव्यवस्थित यातायात, सड़कों तक पसरा दुकानों का सामान और अस्तव्यस्त शहर ही इसकी पहचान बन गई है। पर्यटक सुविधाओं के विकास के लिए काफी कुछ किया जाना चाहिए।