अनुसूचित जाति के हजारों लाभार्थियों को चार साल से समाज कल्याण विभाग की ओर से छात्रवृत्ति नहीं मिल पाई है। इससे लाभार्थियों को विभाग के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। एससी वर्ग को छात्रवृत्ति नहीं मिलने का कारण विभाग बजट का अभाव बता रहा है।
जिला समाज कल्याण विभाग की ओर से कक्षा एक से पोस्ट ग्रेजुएट होने और तकनीकी शिक्षा के लिए राज्य सरकार की ओर से अलग-अलग छात्रवृत्ति तय की गई है। विभाग की ओर से अनुसूचित जाति के लाभार्थियों को वर्ष 2012 से अभी तक छात्रवृत्ति नहीं मिली। जिला समाज कल्याण अधिकारी रतन सिंह रावल का कहना है कि जिले में अनुसूचित जाति के लाभार्थियों की संख्या कुल संख्या 15 हजार से अधिक है। उन्होंने बताया कि मार्च में एससी के लिए विभाग को पच्चीस लाख का बजट मिला था। जो कि एक हजार से अधिक लाभार्थियों को बांटा जा चुका है। उन्होंने बताया कि शासन को साढ़े पांच लाख के बजट की मांग की गई है।
विभाग के अनुसार, अनुसूचित जाति के लाभार्थियों की संख्या कक्षा एक से बारह तक 15800 है जबकि एक हजार से अधिक को छात्रवृत्ति दी गई। अनुसूचित जनजाति के 285 में से अधिकांश लाभार्थियों को छात्रवृत्ति दी जा चुकी है। अन्य पिछड़ा वर्ग के 843 में से पांच सौ से अधिक का छात्रवृत्ति दी जा चुकी है।
बजट की स्थिति
पौड़ी। जिले में अनुसूचित जाति की छात्रवृत्ति के लिए साढ़े तीन करोड़ की डिमांड के सापेक्ष पच्चीस लाख ही प्राप्त हुआ। अनुसूचित जनजाति में चालीस लाख के सापेक्ष 23 लाख व ओबीसी में 1.39 लाख के सापेक्ष 44 लाख ही बजट प्राप्त हुआ।
अलग-अलग मिलती है छात्रवृत्ति
अनुसूचित जाति में कक्षा 1 से 5 तक छह सौ व कक्षा 6 से 8 तक 960 रुपये, अनुसूचित जनजाति को कक्षा 1 से 5 तक पांच सौ व कक्षा 6 से 8 तक आठ सौ, कक्षा 9 व 10 में 2250 और कक्षा 11 व 12 में 2300 रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।