बुधवार को बस की छत पर बैठी सवारियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाए बिना बीच रास्ते में उतारने के मामले को उत्तराखंड की परिवहन कंपनी जीएमओयू ने गंभीरता से लिया है। जीएमओयू ने बस मालिक पर नियमों के अनुसार ढाई हजार रुपये का जुर्माना ठोक दिया है। इसके साथ ही बस का एक रोटेशन भी काट दिया है। कंपनी के निर्देश पर बस मालिक ने सतपुली पहुंचकर जहां घटना पर खेद जताया है, वहीं कंडक्टर की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। इसके साथ ही यात्रियों के किराए के पैसे भी लौटा दिए हैं। जीएमओयू के सतपुली स्टेशन इंचार्ज देव किशोर नेगी ने इसकी पुष्टि की है।
जीएमओयू के महाप्रबंधक वीपीएस नेगी ने बताया कि बस मालिक से इस मामले के लिए जिम्मेदार चालक अथवा परिचालक के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे, जिससे कंपनी की छवि खराब न हो। सतपुली स्टेशन इंचार्ज ने बताया कि जीएमओयू और मोटर मालिकों ने इस मामले पर गहरी नाराजगी जताते हुए इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न होने देने के निर्देश दिए हैं। बस मालिक केशर सिंह ने स्वयं सतपुली पहुंचकर नेपाली मजदूरों के ठेकेदार को उनके किराए के 1600 रुपये लौटाने के साथ ही घटना पर खेद जताया। बस मालिक ने कहा कि मामला संज्ञान में आते ही उन्होंने कंडक्टर की सेवा समाप्त कर दी हैं। बुधवार को उनकी हिमगिरी बस कोटद्वार से रुद्रपयाग के लिए रोटेशन पर निकली थी। बस के कंडक्टर ने सतपुली से पौड़ी जाने के लिए 23 नेपाली यात्रियों को बस की छत पर बैठा लिया, लेकिन सतपुली से दो किमी आगे जाते ही एआरटीओ के चेकिंग की सूचना पर छत पर बैठे यात्रियों को बीच रास्ते में उतार दिया और किराया तक नहीं लौटाया। ‘अमर उजाला’ ने तीन दिसंबर के अंक में इस खबर को ‘छत पर बैठे यात्रियों को बीच रास्ते में उतारा’ शीर्षक से प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था।
क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, व्यापारियों और आम लोगों ने मनमानी करने वाले कर्मचारी पर जीएमओयू की ओर से की गई कार्रवाई की सराहना की है। कहा कि क्षेत्र में जीप, ऑटो चालकों की मनमानी पर भी अंकुश लगाया जाना चाहिए। आए दिन इस तरह की घटनाएं होती हैं, लेकिन प्रकाश में नहीं आ पाती।