कोटद्वार। प्रदेश के महाविद्यालयों में कार्यरत अस्थायी, संविदा प्राध्यापकों ने उनके चार सूत्री मांगों के निराकरण की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत को ज्ञापन भेजा है।महाविद्यालयों में कार्यरत अस्थायी, संविदा प्राध्यापकों ने ज्ञापन में कहा कि उच्च शिक्षा विभाग उत्तराखंड के अंतर्गत विभिन्न राजकीय महाविद्यालयों में गत दस वर्षों से लगातार वह सेवाएं दे रहे थे। लोक सेवा आयोग की ओर नियमित सहायक प्राध्यापकों के महाविद्यालय में पदस्थापन एवं चयन के बाद उच्च शिक्षा विभाग की ओर से विभिन्न विषयों के 150 अस्थायी, संविदा प्राध्यापकों को सेवा से बाहर कर दिया गया है। जिससे अस्थाई प्राध्यापकों का भविष्य अधर में लटक गया है और वह विभाग के निर्णय से काफी निराश हैं। कहा कि सभी संविदा, अस्थायी प्राध्यापक यूजीसी के मानकों के अनुरूप नेट, जेआरएफ, पीएचडी की निर्धारित योग्यताधारी हैं। वांछित योग्यता के बाद भी इन प्राध्यापकों के प्रति उच्च शिक्षा विभाग उदासीन है।
ज्ञापन में अस्थायी, संविदा शिक्षकों ने उनके पदों को रिक्त न मानते हुए इन पदों को भरने के लिए विनियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने, विनियमितीकरण की प्रक्रिया पूर्ण होने तक यूजीसी के मानकाें के अनुसार उन्हें 57,700 रुपये मासिक मानदेय प्रदान करने व एक समान सहायक प्राध्यापक पदनाम देने, विभिन्न विषयों में आयोग की ओर से चयनित नियमित सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति एवं स्थायी प्राध्यापकों के स्थानांतरण के फलस्वरूप प्रभावित हुए पदों पर नितांत अस्थायी प्राध्यापकों के समायोजन की मांग की है। ज्ञापन पर डाॅ. अनुज कुमार, डाॅ. धर्मेंद्र कुमार व डाॅ. आशीष उपाध्याय समेत कई प्राध्यापकों ने हस्ताक्षर किए हैं।