श्रीनगर। अलकनंदा नदी के जल प्रवाह को मोड़ने के लिए पौड़ी व टिहरी जनपद क्षेत्र में खनन पट्टे स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन अलकनंदा नदी में पानी कम होने का फायदा उठाते हुए खनन कारोबारी सीमा से बाहर जमकर खनन कर रहे हैं। स्थिति यह है कि खनन पट्टा स्वीकृत तो टिहरी जनपद की सीमा में है, लेकिन खनन पौड़ी जनपद के सीमा में किया जा रहा है।
शहर क्षेत्र के करीब 12 किमी के दायरे में अलकनंदा किनारे आधा दर्जन खनन पट्टे स्वीकृत किए गए हैं। हालांकि यह पट्टे नदी के जल प्रवाह को मोड़ने के नाम पर लिए गए हैं। पिछले वर्ष तक खनन पट्टे आवंटित होते थे, लेकिन इस इस बार पट्टे आवंटित न होने पर रिवर ट्रेनिंग वर्क (नदी जल प्रवाह मोड़ने का कार्य) के नाम पर पट्टे आवंटित किए गए हैं। इनमें से अधिकांश टिहरी प्रशासन के अधीन हैं। जल विद्युत परियोजना की ओर से पानी रोके जाने से परियोजना झील से नैथाणा झूला पुल तक करीब पांच किमी के दायरे में अलकनंदा में ना के बराबर जल प्रवाह है। नदी में पानी कम होने का खनन कारोबारी भरपूर फायदा उठा रहे हैं। टिहरी जपनद में स्वीकृत पट्टेधारी नदी में पानी न होने से पौड़ी जनपद की सीमा में जमकर खनन कर रहे हैं। वहीं इस पर न तो कीर्तिनगर और ना ही श्रीनगर तहसील प्रशासन कोई कार्रवाई कर रहा है। स्थानीय निवासियों ने तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान उठाए हैं।
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इस पांच किमी के दायरे में श्रीनगर तहसील के तहत कोई पट्टा स्वीकृत नहीं है। यदि कोई कोई सीमा का उल्लंघन कर रहा है तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
वेदपाल सिंह चौधरी , तहसीलदार , श्रीनगर
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इस संबंध में मेरे पास कोई शिकायत नहीं है। शिकायत मिलने पर वह कार्रवाई की जाएगी। नुपुर वर्मा, एसडीएम
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खनन कारोबारियों द्वारा सीमा उल्लंघन किए जाने की शिकायत वह कई बार कीर्तिनगर व श्रीनगर तहसील प्रशासन से कर चुके हैं। लेकिन प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
गोकुलानंद, स्थानीय निवासी